रांची। झारखंड औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण (JIADA) द्वारा आयोजित “Consultative Workshop on Industrial Corridors and Plug & Play Infrastructure” तथा “Stakeholders Consultation on Draft JIADA Regulation-2026” में लघु उद्योग भारती, झारखंड के पदाधिकारियों ने सक्रिय सहभागिता करते हुए उद्योग जगत से जुड़े महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किए।
इस कार्यशाला में रेलवे, जेबीवीएनएल, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सहित विभिन्न सरकारी विभागों के वरिष्ठ अधिकारी तथा अनेक औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। बैठक का मुख्य उद्देश्य जियाडा रेगुलेशन-2026 के मसौदे पर उद्योग जगत की राय प्राप्त करना एवं उसे अधिक प्रभावी एवं उद्योग-अनुकूल बनाना था।
लघु उद्योग भारती, झारखंड की ओर से प्रदेश महामंत्री श्री बिनोद कुमार अग्रवाल ने कहा कि वर्तमान व्यवस्था में औद्योगिक इकाइयों को भवन नक्शा स्वीकृति के लिए जियाडा के साथ-साथ फैक्ट्री इंस्पेक्टर से भी अनुमोदन प्राप्त करना पड़ता है, जबकि जियाडा के पास पहले से ही भवन योजना स्वीकृत करने का अधिकार उपलब्ध है। उन्होंने इस दोहरी प्रक्रिया को समाप्त कर अनुमोदन प्रणाली को सरल एवं एकीकृत बनाने का सुझाव दिया, जिससे उद्यमियों का समय और संसाधन दोनों बच सकें।
इस पर जियाडा के प्रबंध निदेशक श्री वरुण रंजन ने स्पष्ट किया कि औद्योगिक क्षेत्रों में भवन नक्शा स्वीकृति की मुख्य प्राधिकृत संस्था जियाडा ही है तथा फैक्ट्री इंस्पेक्टर केवल कुछ सीमित तकनीकी बिंदुओं की जांच करते हैं। उन्होंने प्रक्रियाओं को और अधिक स्पष्ट एवं सरल बनाने की आवश्यकता को स्वीकार किया।
बैठक के दौरान श्री अग्रवाल ने यह भी सुझाव दिया कि उत्पादन प्रारंभ तिथि (Date of Production) के सत्यापन हेतु जीएसटी अधिकारियों के निरीक्षण की अनिवार्यता उद्योगों पर अतिरिक्त प्रशासनिक बोझ उत्पन्न करती है। उन्होंने कहा कि जियाडा के अधिकारी स्वयं निरीक्षण कर उत्पादन प्रारंभ होने की पुष्टि कर सकते हैं, इसलिए इस प्रावधान की समीक्षा की जानी चाहिए।
इस पर जियाडा के प्रबंध निदेशक ने जानकारी दी कि प्राधिकरण एक Unified IT System विकसित कर रहा है, जिसके माध्यम से विभिन्न विभागों की प्रक्रियाओं को एकीकृत किया जाएगा। इसके लागू होने के बाद ऐसी अतिरिक्त औपचारिकताओं की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी तथा उद्योगों को अधिक सुगम सेवाएं प्राप्त होंगी।
लघु उद्योग भारती ने औद्योगिक भूखंडों की लीज अवधि बढ़ाने का भी सुझाव दिया। श्री अग्रवाल ने कहा कि बिहार सहित कई राज्यों में औद्योगिक भूखंडों की लीज अवधि 90 से 99 वर्षों तक निर्धारित है, जबकि झारखंड में वर्तमान में यह अवधि 30 वर्ष है। उन्होंने दीर्घकालिक निवेश को प्रोत्साहित करने तथा निवेशकों का विश्वास बढ़ाने के लिए लीज अवधि को पुनः 90 अथवा 99 वर्ष किए जाने की मांग रखी।
लघु उद्योग भारती, झारखंड ने जियाडा द्वारा उद्योग-अनुकूल एवं निवेश प्रोत्साहक नियमावली तैयार करने की पहल का स्वागत करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि उद्योग संगठनों के सुझावों को समाहित कर तैयार किया जाने वाला जियाडा रेगुलेशन-2026 राज्य में औद्योगिक विकास, निवेश आकर्षण और रोजगार सृजन को नई गति प्रदान करेगा।
कार्यशाला में लघु उद्योग भारती की ओर से श्री विजय छापड़िया, श्री सुरेंद्र सिंह, दुमका से उपाध्यक्ष श्री के.एन. सिंह, सदस्य श्री आदित्य छापड़िया तथा श्री बिनोद तुलस्यान सहित अन्य प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।
– बिनोद कुमार अग्रवाल
प्रांतीय महामंत्री, लघु उद्योग भारती, झारखंड