भारत को विकसित बनाने के लिए हमारी तैयारी क्या है?
15 अगस्त, 2047 को जब देश स्वाधीनता के 100 वर्ष मना रहा होगा, तब तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने देश के सामने रखा है। प्रधानमंत्री जी ने इस लक्ष्य में युवा, गरीब, महिला व किसान के आर्थिक सशक्तिकरण, तकनीकी नेतृत्व और समावेशी विकास पर जोर दिया है। विकसित भारत के बड़े लक्ष्य को साकार करने में कौशल विकास की महत्वपूर्ण भूमिका है और ये देश की तत्काल एवं दीर्घकालिक आवश्यकताओं की पूर्ती करने में भी मददगार साबित होगा। लेकिन सिर्फ लक्ष्य सामने रखने से कार्य सिद्धी नहीं होगी, इसके लिए हमारे पास कारगर कार्यक्रम भी होना चाहिए।
बदलता वैश्विक और राष्ट्रीय परिदृश्य
वैश्विक परिदृश्य तेजी से बदल रहा है। अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फिर से सत्ता में आने के साथ, चीन के प्रति अमेरिकी नीतियों में सख्ती की उम्मीद है। ऐसे में कई अमेरिकी व्यवसाय अपनी विनिर्माण (manufacturing) इकाइयाँ चीन से बाहर स्थानांतरित करने पर विचार कर सकते हैं।
वैश्वीकरण और भू-राजनीतिक घटनाक्रमों ने भारत को एक महत्वपूर्ण मोड़ पर ला खड़ा किया है। चीन की वैश्विक विनिर्माण में पकड़ कमजोर हो रही है, और देश वैकल्पिक बाजारों की तलाश में हैं। भारत, अपनी बढ़ती अर्थव्यवस्था और अनुकूल जनसांख्यिकी के कारण, स्वाभाविक रूप से एक मजबूत उम्मीदवार है।
हालांकि, वैश्विक व्यवसायों को आकर्षित करना केवल नीतिगत सुधारों या कर लाभों के माध्यम से संभव नहीं है- यह लोगों पर निर्भर करता है। भारत कार्यबल (workforce) को न केवल अत्याधुनिक तकनीकी कौशल में प्रशिक्षित होना चाहिए, बल्कि उन्हें संचालन विशेषज्ञता भाषा दक्षता, नेतृत्व गुण और आलोचनात्मक सोच जैसे कौशलों सेो भी सुसज्जित होना होगा।
नीति आयोग और वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की रिपोर्ट बताती हैं कि कार्यबल की मौजूदा कुशलता और उद्योग की मांगों के बीच एक बड़ा अंतर है। इस अंतर को पाटना केवल एक आर्थिक आवश्यकता नहीं है, बल्कि यह एक राष्ट्रीय प्राथमिकता है।
कौशल विकास के प्रमुख दृष्टिकोण
- आर्थिक दृष्टिकोण वैश्विक निवेश के लिए कार्यबल की तैयारी
जैसे-जैसे विनिर्माण इकाइयाँ और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएँ भारत में स्थानांतरित होती हैं, लॉजिस्टिक्स, गुणवत्ता नियंत्रण और औद्योगिक संचालन जैसे क्षेत्रों में कुशल श्रमिकों की मांग बढ़ेगी। इसके अतिरिक्त, उद्योगों को चाहिए:
a. सप्लाई चेन मैनेजमेंट
b. प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेशन
c. बिजनेस एनालिटिक्स
तत्काल फोकसः कार्य कुशलता, निर्यात अनुपालन और अंतरराष्ट्रीय व्यापार संचार में प्रशिक्षण कार्यक्रम।
दीर्घकालिक फोकसः व्यावसायिक प्रशिक्षण को शैक्षणिक पाठ्यक्रम में एकीकृत करना और औद्योगिक क्षेत्रों में इंटर्नशिप को बढ़ावा देना।
- तकनीकी दृष्टिकोणः कोडिंग से आगे बढ़ते हुए तकनीकी कौशल महत्वपूर्ण हैं, लेकिन कौशल विकास को केवल कोडिंग तक सीमित नहीं किया जा सकता। Springboard Skills Gap Trends 2024 रिपोर्ट के अनुसार
a. वर्तमान नौकरियों का केवल 25% हिस्सा भविष्य की तकनीकी आवश्यकताओं के अनुरूप है।
b. डिजिटल साक्षरता, अनुकूलनशीलता और डेटा का बुनियादी ज्ञान सभी उद्योगों में आवश्यक होंगे।
तत्काल फोकसः डिजिटल साक्षरता, क्लाउड कंप्यूटिंग और बुनियादी तकनीकी उपकरणों में प्रशिक्षण।
दीर्घकालिक फोकसः कांटम कंप्यूटिंग, IoT, एआई, ब्लॉकचेन या साइबर सुरक्षा और स्वच्छ ऊर्जा समाधानों जैसे उभरते क्षेत्रों में प्रशिक्षण।
- शैक्षिक दृष्टिकोण: अकादमिक प्रणाली का उद्योग आवश्यकताओं से तालमेल: भारत की शिक्षा प्रणाली को रटने की बजाय व्यावहारिक, कौशल-आधारित शिक्षण की ओर बढ़ना होगा। स्कूलों और विश्वविद्यालयों को ध्यान देना चाहिए:
a. समस्या समाधान क्षमता
b. आलोचनात्मक सोच और रचनात्मकता
c. सहयोग और संचार कौशल
तत्काल फोकसः लघु अवधि के उद्योग-उन्मुख पाठ्यक्रम और प्रमाण-पत्र कार्यक्रम।
दीर्घकालिक फोकसः पाठ्यक्रम में अनुभवात्मक शिक्षा और इंटर्नशिप को प्रारंभिक स्तर से शामिल करना।
- सामाजिक दृष्टिकोणः समावेशन के लिए प्रयास नीति आयोग की 2021 की एक रिपोर्ट के अनुसारः
a. भारत की कार्यशील जनसंख्या (15 से 64 वर्ष के बीच) वर्ष 2030 तक 1 अरब तक पहुँच जाएगी, जो चीन को पीछे छोड़ देगी। भारत की 65% जनसंख्या 35 वर्ष से कम आयु की है।
b. बढ़ती कार्यशील जनसंख्या को समाहित करने के लिए हर वर्ष 1.2 करोड़ नई नौकरियों की आवश्यकता है। हर वर्ष 5 करोड़ लोगों को कौशल प्रशिक्षण की जरूरत है, जबकि वर्तमान क्षमता केवल 30 लाख लोगों को प्रशिक्षित करने की है।
c. भारत में लगभग 90 करोड़ लोग ‘उभरते मध्यवर्ग’ और ‘मध्यवर्ग’ का हिस्सा बन गए हैं, जो नई संभावनाएँ और अवसर प्रदान करेंगे।
d. बाजार में सफलता के लिए कंपनियों को नई सोच अपनानी होगी और innovative business model के माध्यम से नए उत्पाद एवं सेवाएं लानी होंगी।
तत्काल फोकस: ग्रामीण क्षेत्रों, महिलाओं और युवाओं के लिए डिजिटल कौशल अभियान।
दीर्घकालिक फोकसः कौशल विकास के अवसरों को सभी के लिए समान रूप से उपलब्ध कराना।
- सॉफ्ट स्किल्सः नजरअंदाज किए गए लेकिन महत्वपूर्ण कौशल
वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम रिपोर्ट के अनुसार, आवश्यक सॉफ्ट स्किल्स में शामिल हैं:
a. भावनात्मक बुद्धिमत्ता
b. अनुकूलनशीलता
c.वार्ता कौशल
d. नेतृत्व और टीम प्रबंधन
तत्काल फोकसः संगठनों में सॉफ्ट स्किल्स पर प्रशिक्षण कार्यक्रम।
दीर्घकालिक फोकसः स्कूल और कॉलेज पाठ्यक्रम में सॉफ्ट स्किल्स को अनिवार्य बनाना।
चुनौतियाँ और समाधान
मुख्य चुनौतियाँः
a. शिक्षा और उद्योग की आवश्यकताओं के बीच असंगति।
b. व्यावसायिक प्रशिक्षण के प्रति जागरूकता की कमी।
c. बुनियादी ढांचे की कमी।
समाधानः
a. सार्वजनिक-निजी भागीदारी।
b. डिजिटल साक्षरता अभियान।
c. शैक्षणिक संस्थानों में कौशल विकास का एकीकरण।
भविष्य की राहः
a. अल्पकालिक लक्ष्यः तत्काल उद्योग आवश्यकताओं को पूरा करना।
b. मध्यमकालिक लक्ष्यः शिक्षा प्रणाली में कौशल आधारित शिक्षण को प्राथमिकता देना।
c. दीर्घकालिक लक्ष्यः तकनीकी और मानवीय कौशल का संतुलित विकास ।
निष्कर्ष
विकसित भारत का सपना केवल नीतियों से साकार नहीं होगा; इसके लिए कौशल विकास में हर स्तर पर निवेश की आवश्यकता है। क्या हम तैयार हैं? इस प्रश्न का उत्तर हमारे आज के प्रयासों में छिपा है।
Top 10 skills of 2023
- Analytical thinking
- Technological literacy
- Creative thinking
- Dependability and attention to detail
- Resilience, flexibility and agility
- Empathy and active listening
- Motivation and self-awareness
- Leadership and social influence
- Quality control
- Curiosity and lifelong learning
Source: World Economic Forum, Future of Jobs Report 2023

