अनंत संभावनाओं के आकाश तले भारत का युवा आज इस सूचना-प्रधान युग में अपने भविष्य को लेकर कहीं उलझन में तो नहीं है?
आज जब करियर के विकल्प तेजी से बदल रहे हैं, एक ओर जहाँ सरकारी नौकरियों के प्रति युवाओं की रुचि कम होती जा रही है, वहीं दूसरी ओर कॉर्पोरेट जगत एवं बहुराष्ट्रीय कंपनियों में लक्ष्य पूरे करने का दबाव, कार्य का तनाव, लगातार अव्वल बने रहने की प्रतिस्पर्धा तथा कभी भी नौकरी समाप्त हो जाने की आशंका युवा वर्ग को चिंतित कर रही है। आईटी क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के कारण उत्पन्न अनिश्चितता तथा वैश्विक परिस्थितियों के चलते विदेशों में रोजगार का आकर्षण भी कुछ कम हुआ है।

इन सबके बीच भारत में लघु एवं सूक्ष्म उद्योग युवाओं के लिए आशा की एक नई किरण बनकर उभरे हैं। चाहे वह स्टार्टअप के रूप में हो अथवा अपने पैतृक व्यवसाय को नए स्वरूप में आगे बढ़ाने की बात हो, आज का युवा अपने दम पर उद्योग स्थापित करने और उसे आगे बढ़ाने की नई सोच के साथ स्वयं, समाज और राष्ट्र की प्रगति की नई इबारत लिखने को तैयार है।
स्वयं और राष्ट्र की प्रगति की नई इबारत लिखने को तैयार आज का युवा — यह मेरा मात्र कथन नहीं, बल्कि एक सत्य है। भारतवर्ष ने ऐसा दौर पहले कभी नहीं देखा। जहाँ एक ओर सरकारें युवाओं को उद्यमी बनाने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर लघु उद्योग भारती जैसे राष्ट्रवादी संगठन “उद्योग हित – राष्ट्रहित” के ध्येय वाक्य के साथ राष्ट्र को परम वैभव तक पहुँचाने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं।
केंद्र सरकार की स्टार्टअप इंडिया, मुद्रा योजना, PMEGP (Prime Minister’s Employment Generation Programme), CGTMSE योजना, इन्क्यूबेशन सेंटर, RAMP तथा आईटीआई विकास जैसी अनेक योजनाएँ उद्यमी बनने के इच्छुक प्रत्येक युवा एवं नागरिक के लिए उपलब्ध हैं। वहीं राज्य सरकारें भी विभिन्न योजनाओं के माध्यम से युवाओं को उद्यमी बनाने हेतु निरंतर प्रयासरत हैं।
एक ओर जहाँ इन योजनाओं के माध्यम से पूंजी की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है, वहीं दूसरी ओर नए औद्योगिक पार्कों एवं औद्योगिक क्षेत्रों के विकास द्वारा भूमि की उपलब्धता भी सुनिश्चित की जा रही है।
इन सबके बीच लघु उद्योग भारती जैसे राष्ट्रवादी संगठन उद्यमी बनने के इच्छुक प्रत्येक युवा एवं सामान्य नागरिक को दिशा प्रदान करने का कार्य कर रहे हैं। 65,000 से अधिक सदस्यों वाला यह संगठन संपूर्ण भारतवर्ष में उद्यमियों के निर्माण का कार्य कर रहा है।
CSIR जैसे संस्थानों के साथ मिलकर नई तकनीक एवं पेटेंट उपलब्ध कराना, GeM पोर्टल के माध्यम से सरकारी खरीद में उद्यमियों की भागीदारी सुनिश्चित करना, Industrial Academic Partnership Program के माध्यम से युवाओं को उद्यमिता की ओर प्रेरित करना तथा वर्तमान उद्यमियों के लिए अनुसंधान के नए द्वार खोलना—ये सभी उल्लेखनीय प्रयास हैं।
इसी प्रकार SIDBI जैसी संस्थाओं के साथ समझौता ज्ञापनों (MoU) के माध्यम से उद्यमी हितों की बात करना, स्थानीय स्तर से लेकर राज्य एवं केंद्र स्तर तक उद्योगों से संबंधित विषयों पर चिंतन-मंथन करना तथा उद्योग हित में नीतिगत परिवर्तन करवाना, लघु उद्योग भारती द्वारा निरंतर किए जाने वाले कार्य हैं। राष्ट्र को परम वैभव तक ले जाने के लिए समर्पित उद्यमी सदस्यों द्वारा यह कार्य पिछले 32 वर्षों से निःशब्द रूप से निरंतर किया जा रहा है।
उद्योग हित के लिए इतना अनुकूल वातावरण पहले कभी नहीं रहा। आज निर्यात की अनंत संभावनाएँ उपलब्ध हैं और शासकीय सहयोग भी प्राप्त है। वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों से कुछ अवरोध अवश्य उत्पन्न हुए हैं, किंतु बादल कब तक सूर्य को ढक सकते हैं?
भारत की युवा शक्ति एक बार पुनः अपने उद्यम के माध्यम से विश्व को नेतृत्व देने के लिए तैयार खड़ी है और विश्व भी विभिन्न व्यापारिक समझौतों (Trade deal)के माध्यम से उसके साथ कदम मिलाने को तत्पर दिखाई देता है। आज आवश्यकता केवल एक कदम आगे बढ़ाने की है; हाथ थामने के लिए पूरी कायनात तैयार है।
यही विश्वास आज के युवा भारत की सबसे बड़ी पूँजी है।
इसी संदर्भ में श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी की ये पंक्तियाँ स्मरण हो आती हैं—
“कभी थे अकेले हुए आज इतने,
नहीं तब डरे तो भला अब डरेंगे “
मधुसूदन दादू
अध्यक्ष
लघु उद्योग भारती

