आज दिनांक 03 जून 2026 को लघु उद्योग भारती, मध्य प्रदेश के सौजन्य से मध्य प्रदेश शासन के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) मंत्री श्री चैतन्य काश्यप से सौजन्य भेंट एवं विस्तृत चर्चा का अवसर प्राप्त हुआ। इस महत्वपूर्ण बैठक में महाराजपुरा औद्योगिक क्षेत्र से जुड़े विभिन्न विकासात्मक एवं जनहितकारी विषयों को प्रमुखता से उठाया गया।
बैठक के दौरान मंत्री महोदय को सेक्टर-ए की हरित भूमि पर हुए अतिक्रमण एवं अवैध निर्माण के संबंध में विस्तार से अवगत कराया गया। उन्हें बताया गया कि जिस निर्माण कार्य को पूर्व में जिला उद्योग केंद्र (DIC) के महाप्रबंधक श्री सुनील बाबू त्रिपाठी द्वारा रुकवाया गया था, उसे पुनः प्रारंभ कर दिया गया है। इस गंभीर विषय पर मंत्री महोदय ने तत्काल संबंधित अधिकारियों से चर्चा करते हुए निर्देश दिए कि जिला प्रशासन एवं नगर निगम के सहयोग से निर्माण कार्य को तत्काल प्रभाव से रोका जाए तथा अवैध निर्माण को नियमानुसार हटाने की आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
इसके अतिरिक्त, महाराजपुरा औद्योगिक क्षेत्र की वर्षों पुरानी एवं जर्जर हो चुकी जल पाइपलाइन के नवीनीकरण हेतु बजट स्वीकृति का अनुरोध भी किया गया। उद्योगों के सुचारु संचालन एवं माल परिवहन में आ रही कठिनाइयों को देखते हुए क्षेत्र को पूर्व में प्राप्त नो-एंट्री छूट को पुनः बहाल करने की मांग भी प्रमुखता से रखी गई।
बैठक में केवल औद्योगिक विद्युत आपूर्ति के लिए प्रस्तावित 5 MVA विद्युत उपकेंद्र (सबस्टेशन) की स्थापना का विषय भी उठाया गया। इसके लिए महाराजपुरा औद्योगिक क्षेत्र के भीतर उपयुक्त भूमि आवंटित किए जाने का अनुरोध किया गया। प्रतिनिधिमंडल ने मंत्री महोदय को अवगत कराया कि प्रस्तावित स्थल का निरीक्षण विद्युत विभाग के अधिकारियों द्वारा किया जा चुका है तथा इसे वर्तमान एवं भविष्य की औद्योगिक आवश्यकताओं के अनुरूप उपयुक्त पाया गया है।
मंत्री श्री चैतन्य काश्यप ने सभी विषयों को गंभीरता से सुना तथा संबंधित समस्याओं के समाधान हेतु आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन प्रदान किया। उद्योग जगत को आशा है कि इन महत्वपूर्ण मुद्दों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लिए जाएंगे, जिससे महाराजपुरा औद्योगिक क्षेत्र की लंबे समय से लंबित समस्याओं का समाधान होगा और क्षेत्र के औद्योगिक विकास को नई गति मिलेगी।
यह बैठक उद्योगों की समस्याओं के समाधान एवं औद्योगिक विकास के प्रति सरकार और उद्योग जगत के बीच समन्वय एवं प्रतिबद्धता का एक महत्वपूर्ण उदाहरण रही।