काशी प्रांत की मासिक बैठक में बनारसी साड़ी उद्योग के संरक्षण और चुनौतियों पर चर्चा
लघु उद्योग भारती, काशी प्रांत की मासिक बैठक में हथकरघा से बनने वाली पारंपरिक बनारसी साड़ी उद्योग को बढ़ावा देने और पावरलूम से बनी साड़ियों के कारण हो रहे नुकसान पर गंभीर चर्चा की गई। बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि असली बनारसी साड़ी सदियों से हथकरघा पर ही तैयार की जाती रही है, जिसका संबंध प्रभु राम और संत कबीर के समय से बताया जाता है।
पावरलूम से बनने वाली साड़ियों के कारण हथकरघा कारीगरों के रोजगार पर संकट खड़ा हो रहा है। इसके अलावा, पावरलूम से बनी साड़ियों को बनारसी साड़ी के रूप में बेचा जा रहा है, जिससे इस ऐतिहासिक और पारंपरिक शिल्प की प्रामाणिकता और विशिष्टता पर प्रश्नचिह्न लग रहा है। पावरलूम के जरिए सूरत, अन्य राज्यों और यहां तक कि चीन में भी बनारसी साड़ियों की नकल की जा रही है, जो असली बनारसी साड़ी का स्थान नहीं ले सकती।
बैठक में इस मुद्दे पर विचार किया गया कि हथकरघा कारीगरों को उचित समर्थन और पहचान कैसे दी जाए, जिससे वे इस उद्योग में टिके रह सकें और बनारसी साड़ियों की असली पहचान और गुणवत्ता को बनाए रखा जा सके। बैठक में पारंपरिक हथकरघा उद्योग को संरक्षित करने और प्रोत्साहित करने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता पर बल दिया गया, ताकि इस ऐतिहासिक धरोहर को बचाया जा सके और आने वाली पीढ़ियों तक इसकी मौलिकता बनी रहे।

