भारत पहली बार स्टोन इंडस्ट्री प्रदर्शनी 2025 (रूस) में उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भेजेगा – वैश्विक मंच पर होगा भारत के पत्थर उद्योग का प्रतिनिधित्व
???? स्थान: क्रोकस एक्सपो सेंटर, मॉस्को, रूस
???? तारीख: 24 से 26 जून 2025
भारत पहली बार संगठित रूप से रूस में आयोजित होने जा रही स्टोन इंडस्ट्री 2025 अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी में भाग ले रहा है। यह प्रदर्शनी रूस एवं पूर्वी यूरोप के प्राकृतिक पत्थर उद्योग की सबसे प्रमुख प्रदर्शनी मानी जाती है, जिसमें संगमरमर, ग्रेनाइट, टूल्स, मशीनरी, रसायन, डिजाइन और निर्माण क्षेत्र से जुड़ी विश्वस्तरीय कंपनियां भाग लेती हैं। भारत की इस ऐतिहासिक भागीदारी का उद्देश्य India Stone Mart के अंतरराष्ट्रीय प्रचार और सहभागिता को एक नई दिशा देना है।
भारत के इस उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल में शामिल हैं – लघु उद्योग भारती के राष्ट्रीय सचिव श्री नरेश पारीक, (CDOS) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री मुकुल रस्तोगी, प्रांत संयुक्त महासचिव श्री सुरेश बिश्नोई, एवं जयपुर इकाई के उपाध्यक्ष श्री दीपक अजमेरा। यह प्रतिनिधिमंडल रूस में विभिन्न B2B इवेंट्स, व्यापारिक संवादों और बैठकों के माध्यम से भारतीय पत्थर उद्योग को वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत करेगा, नए साझेदारों से संपर्क स्थापित करेगा, और India Stone Mart 2026 के लिए अंतरराष्ट्रीय भागीदारी को सशक्त करेगा।
स्टोन इंडस्ट्री 2025 में 300 से अधिक प्रदर्शक भाग ले रहे हैं, जिनमें इटली, चीन, तुर्की, ईरान जैसे देशों के नेशनल पवेलियन विशेष आकर्षण होंगे। यह आयोजन क्रोकस एक्सपो सेंटर के हॉल नंबर 4 में आयोजित किया जा रहा है, जो 10,750 वर्ग मीटर क्षेत्र में फैला है और मेट्रो कनेक्टिविटी, आधुनिक लोडिंग सुविधाएं और विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर से युक्त है।
इस भागीदारी से भारतीय कंपनियों को रूस, CIS देशों और पूर्वी यूरोप में निर्यात, तकनीकी सहयोग और निवेश के नए अवसर प्राप्त होंगे। इससे पहले इटली, तुर्की, अमेरिका, चीन और ब्रिटेन में भी लघु उद्योग भारती का प्रतिनिधिमंडल भारत की ओर से सफलतापूर्वक भागीदारी कर चुका है।
भारत के लिए यह अवसर केवल व्यापारिक नहीं, बल्कि रणनीतिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है, जिसमें देश के प्राकृतिक संसाधनों, नवाचार और निर्माण क्षमता को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत किया जाएगा। यह भागीदारी न केवल India Stone Mart 2026 के लिए वैश्विक निवेशकों, वितरकों और डिजाइनरों को भारत की ओर आकर्षित करेगी, बल्कि भारत के पत्थर उद्योग की वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भागीदारी को भी सशक्त बनाएगी।

