पहली बार स्वामीनारायण (अक्षरधाम मंदिर) की होगी सहभागिता इंडिया स्टोनमार्ट-2026 में
इंडिया स्टोनमार्ट-2026 में पहली बार स्वामीनारायण संप्रदाय की ओर से मंदिर निर्माण की अद्भुत कला, आधुनिक तकनीक और धार्मिक शिल्प परंपरा का जीवंत प्रदर्शन 450 वर्ग मीटर क्षेत्र में किया जाएगा। राजस्थान के सिरोही जिले के पिंडवाड़ा में स्थित इस संस्था की अत्याधुनिक कार्यशाला में 250 से अधिक सीएनसी मशीनों द्वारा भव्य मंदिरों, मूर्तियों और शिल्प घटकों का निर्माण अत्यंत परिशुद्धता के साथ किया जाता है। अब तक संस्था द्वारा विश्वभर में 1,100 से अधिक मंदिरों का निर्माण किया जा चुका है, जिनमें नई दिल्ली स्थित विश्वविख्यात अक्षरधाम मंदिर प्रमुख है। यह मंदिर अपनी 234 नक्काशीदार स्तंभों, 9 गुम्बदों और 20,000 से अधिक मूर्तियों के लिए प्रसिद्ध है और इसे गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में “विश्व का सबसे बड़ा व्यापक हिंदू मंदिर” घोषित किया गया है।
इससे पूर्व, स्वामीनारायण संस्था की सहभागिता को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया था, जिसमें स्वामी ईश्वरदास जी महाराज, स्वामी अक्षर प्रेम जी महाराज के साथ-साथ लघु उद्योग भारती की ओर से श्री नरेश पारीक (राष्ट्रीय सचिव), योगेश गौतम (पूर्व राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष), नटवरलाल अजमेरा (संयोजक, स्टोनमार्ट) तथा श्री सुरेश बिश्नोई (अध्यक्ष, जोधपुर प्रांत) ने भाग लिया। सभी ने स्वामीनारायण संस्था की सहभागिता को ऐतिहासिक और प्रेरणादायक बताते हुए इसे भारतीय पत्थर शिल्प और आध्यात्मिक स्थापत्य की वैश्विक पहचान के रूप में सराहा।
आज, प्रस्तावित स्थल JECC (जयपुर एग्ज़िबिशन एंड कन्वेंशन सेंटर) का निरीक्षण स्वामीनारायण संस्था की टीम द्वारा किया गया। स्वामी अक्षर प्रेम जी महाराज अपनी टीम के साथ JECC पहुंचे और संभावित प्रदर्शनी क्षेत्र का अवलोकन किया। इस अवसर पर CDOS टीम, श्री मुकुल रस्तोगी (CEO, CDOS), श्री विवेक जैन (वरिष्ठ उप महाप्रबंधक, CDOS), नोवोटेल होटल की ओर से श्री सार्थक दास एवं श्री शशांक सोलंकी (दोनों सेल्स मैनेजर) उपस्थित रहे। साथ ही लघु उद्योग भारती की ओर से श्री नरेश पारीक (राष्ट्रीय सचिव), नटवरलाल अजमेरा (संयोजक, स्टोनमार्ट) तथा श्री सुरेश बिश्नोई (अध्यक्ष, जोधपुर प्रांत) ने भी इस निरीक्षण में भाग लिया। सभी अधिकारियों एवं प्रतिनिधियों ने स्थल की अवस्थिति, सुविधाओं और प्रदर्शनी स्वरूप पर गहन चर्चा की और आयोजन की सफलता हेतु आवश्यक समन्वय सुनिश्चित किया।
इंडिया स्टोनमार्ट-2026 में स्वामीनारायण संस्था की यह भागीदारी न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का कार्य करेगी, बल्कि आधुनिक निर्माण तकनीकों के साथ भारत की आध्यात्मिक शिल्पकला को वैश्विक मंच पर प्रभावशाली रूप में प्रस्तुत करने का सशक्त माध्यम भी बनेगी।

