यह माइनिंग सेमिनार न केवल खनिज नीति पर जानकारी साझा करने का माध्यम था, बल्कि उद्यमियों, विशेषज्ञों और सरकारी अधिकारियों के बीच एक संवाद मंच के रूप में भी कार्य कर रहा था। अतिरिक्त खान निदेशक महेश माथुर द्वारा नई खनन नीति और राज्य की जीडीपी में माइनिंग सेक्टर के बढ़ते योगदान को प्रस्तुत करने से प्रतिभागियों को नीतिगत परिवर्तनों की बेहतर समझ मिली। इसके साथ ही, खनिज धारकों की समस्याओं पर चर्चा और उनके समाधान के प्रयास से सेमिनार व्यावहारिक रूप से उपयोगी बन गया।
ड्रोन तकनीक के उपयोग की पहल, जिसे लघु उद्योग भारती के अध्यक्ष घनश्याम ओझा द्वारा शुरू किया गया, खनन क्षेत्र में नवाचार को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक सराहनीय कदम था। ड्रोन तकनीक न केवल खनन को अधिक कुशल और सुरक्षित बना सकती है, बल्कि पर्यावरणीय प्रभावों को कम करने में भी सहायक हो सकती है।
इसके अलावा, कार्यक्रम संयोजक शांतिचंद सालेचा द्वारा लीज धारकों और खनिज उद्यमियों की समस्याओं को उठाते हुए मुख्यमंत्री को ज्ञापन प्रस्तुत करना, इस आयोजन को नीति-निर्माण प्रक्रिया के करीब ले गया। इस प्रकार के आयोजन केवल ज्ञान-वर्धक सत्र तक सीमित नहीं होने चाहिए, बल्कि समस्याओं के समाधान, तकनीकी नवाचार और उद्योग के लिए नई संभावनाओं को तलाशने का मंच भी बनने चाहिए।
इस आयोजन को और प्रभावशाली बनाने के लिए कुछ अतिरिक्त पहल की जा सकती थी, जैसे ड्रोन तकनीक का लाइव डेमोंस्ट्रेशन, खनन क्षेत्र के उभरते अवसरों पर सत्र, और उद्यमियों की सफलता की कहानियों को साझा करना। इसके अलावा, समस्याओं के समाधान के लिए पैनल चर्चा और विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर संबंधित विभागों तक पहुँचाना इस आयोजन के प्रभाव को और बढ़ा सकता था।
कुल मिलाकर, यह सेमिनार खनिज उद्योग को प्रोत्साहित करने और सरकारी नीतियों तथा उद्योग की आवश्यकताओं के बीच समन्वय स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था। ऐसे आयोजनों का विस्तार और उनकी व्यापक पहुँच सुनिश्चित करना, खनिज क्षेत्र के विकास में एक मजबूत आधारशिला साबित हो सकता है।

