ESI की SPREE योजना पर कार्यशाला: सामाजिक सुरक्षा की ओर एक महत्वपूर्ण कदम
22 जुलाई 2025 को भरतपुर के चैंबर भवन, नई मंडी में एक महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन हुआ, जिसका उद्देश्य था – “ESI की SPREE योजना 2025” के माध्यम से अधिक से अधिक नियोक्ताओं और कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा कवरेज से जोड़ना। इस कार्यशाला का आयोजन लघु उद्योग भारती भरतपुर इकाई और भरतपुर चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज ने संयुक्त रूप से किया।
कार्यक्रम की शुरुआत भगवान विश्वकर्मा के समक्ष दीप प्रज्वलन से हुई। इसके बाद लघु उद्योग भारती भरतपुर के अध्यक्ष डॉ. प्रेम सिंह कुंतल ने स्वागत भाषण में कार्यशालाओं को उद्योग और शासन के बीच संवाद का माध्यम बताया, जिससे नीतियों की सही समझ और समस्याओं का समाधान संभव होता है।
कार्यशाला में कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआई) भरतपुर के वरिष्ठ अधिकारी – शाखा प्रबंधक श्री रामकेश मीणा, डिस्पेंसरी प्रभारी डॉ. वेदप्रकाश, डॉ. धर्मेंद्र और कार्यालय अधिकारी श्री राकेश सोनी विशेष रूप से उपस्थित रहे। डॉ. धर्मेंद्र ने ईएसआई स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार से उल्लेख किया, जबकि श्री राकेश सोनी ने ESIC को केवल एक स्वास्थ्य बीमा नहीं, बल्कि एक समग्र सामाजिक सुरक्षा प्रणाली के रूप में प्रस्तुत किया।
श्री मीणा ने SPREE योजना की विशेषताओं को रेखांकित करते हुए बताया कि यह योजना खासकर उन उद्यमों के लिए है जो अब तक ईएसआई में पंजीकृत नहीं हैं। यह योजना बिना किसी दंड या बकाया की वसूली के भय के, पंजीकरण की प्रक्रिया को सरल बनाकर 1 जुलाई से 31 दिसंबर 2025 तक लागू रहेगी। इसके अंतर्गत अस्थायी और संविदा कर्मियों को भी शामिल किया जा सकता है।
चैंबर अध्यक्ष श्री कृष्ण मुरारी अग्रवाल ने इसे उद्योगों के लिए “सुवर्ण अवसर” बताते हुए कहा कि यह योजना न केवल श्रमिकों के लिए बल्कि उनके पूरे परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करती है — वह भी न्यूनतम लागत पर। उन्होंने अपने प्रतिष्ठान श्री शकुन हुंडई से इस योजना के प्रचार की शुरुआत की घोषणा भी की।
समापन सत्र में लघु उद्योग भारती के महामंत्री श्री राहुल बंसल ने ओपन इंटरेक्टिव सेशन का आयोजन किया, जिसमें उद्यमियों की जिज्ञासाओं का समाधान किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में उद्यमी, सदस्य और गणमान्य लोग उपस्थित रहे, जिससे यह कार्यशाला पूर्णतः सफल और सार्थक सिद्ध हुई।
यह कार्यशाला न केवल जानकारी साझा करने का मंच बनी, बल्कि यह संदेश भी दे गई कि संगठित प्रयासों और सरकारी योजनाओं की जानकारी से ही समावेशी औद्योगिक विकास संभव है।

