लघु उद्योग भारती चंडीगढ़ इकाई – संगठनात्मक सुदृढ़ता और समन्वय का उत्सव
स्थान: चंडीगढ़ | अवसर: कार्यकारिणी घोषणा एवं स्मारिका विमोचन समारोह (वर्ष 2025–2027)
भारत के एकमात्र योजनाबद्ध और सुंदर शहर चंडीगढ़, जो कि “सिटी ब्यूटीफुल” के नाम से प्रसिद्ध है, ने एक बार फिर लघु उद्योग भारती के संगठनात्मक विकास की दिशा में एक प्रभावशाली कदम उठाया। पंजाब और हरियाणा की संयुक्त राजधानी, चंडीगढ़ में आयोजित कार्यक्रम में लघु उद्योग भारती के अखिल भारतीय संगठन मंत्री श्री प्रकाश चंद्र जी ने अपने प्रेरणादायक संबोधन में कहा कि “सम्पर्क, समन्वय, सहभागिता और निरंतरता“—इन्हीं चार स्तंभों पर संगठन की सार्थकता टिकी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि लघु उद्योग भारती का उद्देश्य किसी एकाधिकार की स्थापना नहीं, बल्कि सभी उद्योगों के साथ मिलकर समन्वयात्मक “अंब्रेला संगठन” के रूप में कार्य करते हुए भारत को सर्वसम्पन्न, रोजगारपरक और वैश्विक नेतृत्व की दिशा में अग्रसर करना है।
उन्होंने भारतीय संस्कृति, पारिवारिक समरसता, और तकनीकी उत्कृष्टता के समुचित उपयोग पर भी बल दिया, जिससे राष्ट्र के विकास में संतुलन और मूल्यों की रक्षा हो सके। इस कार्यक्रम के दौरान श्री अवि भसीन को वर्ष 2025–2027 के लिए पुनः अध्यक्ष घोषित किया गया, जबकि श्री मनीष निगम को महासचिव के रूप में नामित किया गया। अन्य पदाधिकारियों का चयन संगठन को स्थानीय स्तर पर अधिक प्रभावी और सक्रिय बनाने हेतु बाद में किया जाएगा।
इस गरिमामयी अवसर पर श्री सुनील खेत्रपाल जी ने अपनी टीम द्वारा किए गए कार्यों का प्रस्तुतिकरण करते हुए उद्यमियों के समक्ष आने वाली विभिन्न समस्याओं और उनके समाधान की चर्चा की। महासचिव श्री मनीष निगम ने अध्यक्ष श्री अवि भसीन के नेतृत्व में 2023–2025 की अवधि में किए गए उल्लेखनीय कार्यों पर आधारित 34-पृष्ठीय रंगीन स्मारिका का विमोचन भी सम्पन्न कराया, जो संगठन की उपलब्धियों और योजनाओं का जीवंत दस्तावेज रही।
कार्यक्रम में अखिल भारतीय उपाध्यक्ष एवं उत्तरी क्षेत्र प्रभारी एडवोकेट श्री अरविंद धूमल जी, सदस्यता समन्वयक श्री विक्रांत शर्मा जी, पंजाब प्रदेशाध्यक्ष श्री प्रदीप मोंगिया जी, संयुक्त महासचिव श्री अनिल शर्मा जी, श्री संदीप मोंगिया, श्री अरुण शर्मा, श्री बॉबी गर्ग, श्री युद्धवीर कौड़ा, श्री अक्षय चुघ, श्री संजीव गुप्ता सहित अनेक गणमान्य एवं सक्रिय कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
यह आयोजन न केवल एक कार्यकारिणी गठन का अवसर था, बल्कि यह संगठनात्मक दृष्टिकोण, विचारों की स्पष्टता, और भविष्य की योजनाओं को साझा करने का एक मंच भी बना। चंडीगढ़ इकाई ने यह साबित किया कि संगठन की जड़ें जितनी विचारों में गहरी होंगी, उतना ही वह समाज और राष्ट्र के विकास में प्रभावी भूमिका निभा सकेगा।

