<p>लघु उद्योग भारती द्वारा आदिवासी समुदाय के लिए एक नया कदम<br>हमारे प्राचीन भारतीय संस्कृति में अपनी जड़ों को मानने वाले और अपनी मातृभूमि के विकास में योगदान देने के लिए संकल्पित लोगों का होना विशेष माना जाता है। इसी भावना के साथ, लघु उद्योग भारती के पूर्व अध्यक्ष संजय चौबे और वनवासी एवं विकास प्रांत हितरक्षा प्रमुख कृष्ण कुमार वैष्णवके नेतृत्व में एक महत्त्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया गया है।<br>इस कार्यशाला में उन्होंने बताया कि कैसे लघु वनोपज के माध्यम से गाँव के लोगों को स्वावलंबी बनाया जा सकता है। यहाँ के दस गाँवों को सामुदायिक वनाधिकार कानून के तहत पहला अधिकार पत्र भी प्रदान किया गया है। उन्होंने अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किए हैं जो साबित करते हैं कि जंगल की सुरक्षा, संवर्धन, एवं प्रबंधन में गाँव के लोगों का अहम योगदान हो सकता है।<br>यह कार्यशाला हर एक गाँव के वनप्रबंधन समिति के अध्यक्ष और सचिवों के लिए आर्थिक योजना निर्माण में मदद करेगी। इसके साथ ही, युवाओं के लिए प्रशिक्षण कार्यशाला की भी योजना बनाई गई है जो न केवल उनकी रोजगार के अवसर प्रदान करेगी बल्कि उन्हें अपनी स्वतंत्र व्यवसायिक दिशा में भी मदद करेगी।<br>यह सब केवल एक कार्यशाला से ही शुरुआत है, और इसे आगे बढ़ाने के लिए हम सभी को मिलकर काम करना होगा। हमारे नेताओं और समुदाय के लोगों के साथ इस उद्देश्य को हासिल करने में अपना योगदान दें।</p>

