लघु उद्योग भारती सुनाम – संयोजक इकाई की गरिमामय घोषणा
राष्ट्र प्रथम नीति, संगठन समर्पण और उद्योग सशक्तिकरण का सशक्त संदेश
लघु उद्योग भारती सुनाम की संयोजक इकाई की औपचारिक घोषणा एक गरिमापूर्ण समारोह में संपन्न हुई, जिसमें संगठन के शीर्ष नेतृत्व की सशक्त उपस्थिति रही। यह आयोजन केवल इकाई गठन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि संगठन की वैचारिक दृढ़ता, नीति-समर्पण और राष्ट्रनिर्माण की प्रतिबद्धता का प्रभावशाली प्रदर्शन भी बना।
समारोह में अखिल भारतीय संगठन मंत्री आदरणीय श्री प्रकाश चंद्र जी, अखिल भारतीय उपाध्यक्ष एवं उत्तरी क्षेत्र प्रभारी एडवोकेट अरविंद धूमल जी, उत्तरी क्षेत्र सदस्यता समन्वयक श्री विक्रान्त शर्मा जी, प्रदेशाध्यक्ष श्री प्रदीप मोंगिया जी तथा संयुक्त महासचिव श्री अनिल शर्मा जी की गरिमामयी उपस्थिति रही। इन्हीं के सान्निध्य में सुनाम इकाई की घोषणा की गई, जिसमें पवित्र सिंगला को जिला संयोजक और विनोद कुमार को सह संयोजक नियुक्त किया गया।
समारोह संयोजक श्री प्रदीप मैनन जी ने सभी कार्यकर्ताओं के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि संगठन की मजबूती का आधार कार्यकर्ताओं की निष्ठा और सक्रियता है। वहीं, अखिल भारतीय उपाध्यक्ष एडवोकेट अरविंद धूमल जी ने अपने विचारों में आह्वान किया कि संगठन की नीति, सोच और उद्देश्य को गांव-गांव, उद्योग-उद्योग तक पहुँचाया जाए, ताकि लघु उद्योग भारती की विचारधारा राष्ट्र के कोने-कोने तक प्रसारित हो सके।
इस अवसर पर अखिल भारतीय संगठन मंत्री श्री प्रकाश चंद्र जी ने अपने ओजस्वी संबोधन में लघु उद्योग भारती की विशिष्टता को रेखांकित करते हुए कहा कि यह संगठन अन्य संगठनों से अलग एक वैचारिक और नीति-आधारित दृष्टिकोण रखता है। उन्होंने बताया कि सूक्ष्म, लघु, मध्यम और कुटीर उद्योग देश की आर्थिक रीढ़ हैं और सर्वाधिक रोजगार उत्पन्न करने वाले क्षेत्र हैं। केंद्र सरकार द्वारा इस क्षेत्र के लिए बनाई गई योजनाओं में लघु उद्योग भारती के सुझावों को महत्व दिया गया है, जो संगठन की वैचारिक प्रासंगिकता और नीति-निर्माण में भागीदारी का प्रमाण है।
उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि आज भारत जिस गति से वैश्विक मंच पर अग्रसर हो रहा है, उसका बड़ा कारण देश की नीति आधारित औद्योगिक व्यवस्था है। वहीं, विकसित कहे जाने वाले कई देश आर्थिक अस्थिरता से जूझ रहे हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आग्रह किया कि वे संगठन की संरचना को और मजबूत करें, नए सदस्यों को जोड़ें और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में लघु उद्योग भारती को अग्रिम पंक्ति में लाएं। उनका संदेश स्पष्ट था – जब हम अपने उद्योग और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाते हैं, तो समाज और राष्ट्र स्वतः सशक्त होता है।
यह कार्यक्रम लघु उद्योग भारती की संगठनात्मक शक्ति, वैचारिक प्रतिबद्धता और राष्ट्रप्रथम दृष्टिकोण का जीवंत प्रतीक बना, जो निश्चित रूप से सुनाम इकाई को एक सशक्त और सक्रिय दिशा प्रदान करेगा।

