लघु उद्योग भारती महिला इकाई ने सेंट्रल जेल, इंदौर में प्राकृतिक होली रंग और गुलाल निर्माण पर एक विशेष निःशुल्क प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया। इस पहल का नेतृत्व इकाई की अध्यक्ष हेमलता कुमार ने किया, जिसमें करीब 150 महिला और पुरुष बंदियों ने भाग लिया। कार्यशाला का उद्देश्य बंदियों को प्राकृतिक उत्पाद निर्माण की तकनीक सिखाना, उन्हें स्वरोजगार के लिए प्रेरित करना और आत्मनिर्भरता की दिशा में अग्रसर करना था।
प्रशिक्षण के दौरान, बंदियों को चुकंदर, पालक, हल्दी, गेंदे, गुलाब और पलाश के फूलों से रासायनिक मुक्त, त्वचा के अनुकूल प्राकृतिक रंग बनाने की विधि सिखाई गई। इसके अलावा, खाने योग्य रंगों और अरारोट के उपयोग से स्वस्थ एवं सुरक्षित गुलाल तैयार करने की प्रक्रिया समझाई गई, जिससे पारंपरिक त्योहारों को और अधिक सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल बनाया जा सके। बंदियों को यह भी बताया गया कि कैसे इन उत्पादों का व्यावसायिक उपयोग किया जा सकता है, जिसमें पैकेजिंग, विपणन और बिक्री से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी शामिल थी। यह ज्ञान न केवल उन्हें भविष्य में स्वरोजगार के अवसर प्रदान करेगा, बल्कि उनके पुनर्वास में भी सहायक सिद्ध होगा।
इस प्रशिक्षण में करीब 50 किलो प्राकृतिक गुलाल तैयार किया गया, जो पूरी तरह पर्यावरण अनुकूल और त्वचा के लिए सुरक्षित था। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बंदियों को रचनात्मक गतिविधियों में संलग्न करना, उन्हें आत्मनिर्भर बनाना और भविष्य में रोजगार के नए अवसरों से जोड़ना था। कार्यशाला के दौरान उपस्थित हेमलता कुमार (अध्यक्ष), अनुजा पुरोहित (उपाध्यक्ष) और प्राची अग्रवाल (कोषाध्यक्ष) ने बंदियों को प्राकृतिक रंगों के महत्व और उनके व्यावसायिक उपयोग की विस्तृत जानकारी दी।
यह अनूठी पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देती है, बल्कि जेल सुधार और पुनर्वास की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे बंदियों को सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने, समाज में पुनः स्थापित होने और अपने कौशल के माध्यम से आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिलेगा।

