आयुर्वेद औषधि निर्माताओं की समस्याओं के समाधान हेतु उपमुख्यमंत्री से मिला लघु उद्योग भारती का प्रतिनिधिमंडल
लघु उद्योग भारती की आयुर्वेद इकाई के एक प्रतिनिधिमंडल ने आयुष एवं उप मुख्यमंत्री श्री प्रेमचंद बैरवा से जयपुर स्थित सचिवालय में भेंट कर राज्य के आयुर्वेदिक औषधि निर्माताओं को आ रही समस्याओं से अवगत कराया। प्रतिनिधिमंडल में प्रदेश महामंत्री श्री सुधीर कुमार गर्ग, जयपुर संभाग अध्यक्ष श्री महेन्द्र मिश्रा, आयुर्वेद इकाई संयोजक श्री विकास योगीराज, सह-संयोजक श्री अनिरुद्ध गोस्वामी, श्री पवन शर्मा एवं श्री उद्गिण गुप्ता शामिल रहे।
प्रतिनिधिमंडल ने निम्न प्रमुख बिंदुओं पर चर्चा करते हुए संबंधित समाधान हेतु निवेदन किया:
आयुर्वेद निदेशक पर अतिरिक्त कार्यभार के कारण औषधि निर्माताओं के कार्यों में हो रही देरी को देखते हुए, एक स्वतंत्र व अनुभवी स्टेट लाइसेंसिंग अथॉरिटी की शीघ्र नियुक्ति की मांग की गई।
औषधियों के अनुमोदन, अनुज्ञा पत्र, जीएमपी नवीनीकरण जैसे कार्यों की समय सीमा तय करने का अनुरोध किया गया ताकि अनावश्यक देरी से व्यापार में हानि न हो।
कार्यों की प्रगति की जानकारी हेतु ऑनलाइन ट्रैकिंग व्यवस्था लागू करने की आवश्यकता बताई गई ताकि निर्माताओं को विभागीय प्रक्रियाओं की वास्तविक स्थिति की जानकारी समय पर मिल सके।
आरजीएचएस योजना में राजस्थान के लघु आयुर्वेद निर्माताओं की सहभागिता को पारदर्शी और सरल बनाने की मांग की गई, ताकि राज्य को जीएसटी राजस्व की हानि से भी बचाया जा सके।
राज्य सरकार की औषधि खरीद में लघु निर्माताओं को टर्नओवर व टेस्टिंग जैसे मानदंडों में छूट देने का सुझाव दिया गया ताकि वे भी इस प्रक्रिया में सम्मिलित हो सकें।
शास्त्रोक्त औषधियों को टैबलेट, कैप्सूल, सिरप जैसे अन्य डोसेज फॉर्म में अनुमोदन देने की अनुमति देने की मांग की गई, जैसा कि अन्य राज्यों व बड़ी कंपनियों में प्रचलित है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुरूप आयुर्वेदिक औषधियों के प्रचार-प्रसार हेतु UIN जारी करने की प्रक्रिया शीघ्र शुरू करने का निवेदन किया गया।
अंत में, प्रतिनिधिमंडल ने एक सुव्यवस्थित व सुविधायुक्त आयुर्वेद औद्योगिक क्षेत्र के विकास की आवश्यकता पर बल दिया।
श्री बैरवा ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को गंभीरता से सुना और समस्याओं के निराकरण हेतु सकारात्मक पहल करने का आश्वासन दिया। उन्होंने लघु आयुर्वेद उद्यमियों को गुणवत्ता पूर्ण औषधि निर्माण के लिए प्रोत्साहित करते हुए कहा कि निकट भविष्य में आयुर्वेदिक चिकित्सा क्षेत्र में बड़ा विस्तार संभावित है और सरकार इसके सहयोग में प्रतिबद्ध है।

