लघु उद्योग भारती ने राजस्थान में निवेश प्रोत्साहन योजना 2024 के लिए दिए महत्वपूर्ण सुझाव।
राजस्थान सरकार के मुख्य सचिव वित्त ने सुझावों को लिया गम्भीरता पूर्वक, विचार करने का दिया आश्वासन।
लघु उद्योग भारती ने आज राजस्थान सरकार के मुख्य सचिव वित्त के साथ बैठक कर राजस्थान में निवेश प्रोत्साहन योजना 2024 के लिए विभिन्न विषयों पर चर्चा की और अपने सुझाव प्रस्तुत किए है। इस बैठक में लघु उद्योग भारती राजस्थान के अध्यक्ष शांति लाल बलाड़, उपाध्यक्ष महेन्द्र खुराना एवम् विनोद सिंघवी, जोधपुर प्रांत सचिव उपस्थित रहे।
लघु उद्योग भारती द्वारा मुख्य मुख्य रूप से सुझाव दिए गए कि जिला स्तर पर कृषि भूमि को औद्योगिक भूमि में कन्वर्ट करवाने में उपखंड अधिकारी को पूर्व की भांति 50000 मीटर तक की कृषि भूमि को औद्योगिक भूमि में कन्वर्ट करने का अधिकार दिया जाना चाहियें। कृषि भूमि को औद्योगिक भूमि में कन्वर्जन करने का अधिकार संभाग स्तर पर दिया जाना चाहिए। रूपांतरण, स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन शुल्क में पुनः 100 प्रतिशत छूट दी जानी चाहिए। नए लगने वाले उद्योगों को रिप्स 2024 में सन 2047 तक के लिये उपरोक्त सभी छूट मिलनी चाहिए, ताकि औद्योगिक क्रांति आ सके और सरकार द्वारा विजन 2047 का लक्ष्य प्राप्त हो किया जा सके। नगर पालिका क्षेत्र में आने वाले उद्योगों को भी कन्वर्जन चार्ज में छूट मिलनी चाहिए। रिप्स 2024 में लगने वाले उद्योगों को बैंकों को दी जाने वाली ब्याज की दर में 7 प्रतिशत की दर से समान रूप से ब्याज सब्सिडी मिलनी चाहिए। राजस्थान सरकार के वित्त विभाग के आर्डर जयपुर दिनांक 10.2.2023 को संशोधन पत्र में संशोधन की आवश्यकता है। भूमि व भवन में नया निवेश संभव ही नहीं है अथवा अव्यावहारिक है। अतः विभाग द्वारा जारी आदेश के पैराग्राफ नंबर एक में संशोधित किया जाना अत्यंत आवश्यक है, जिससे इस योजना का लाभ रुग्ण इकाई को पुनर्जीवित करने में हो सके। संयंत्र और मशीनरी निवेश पर ब्याज लाभ प्राप्त करने के लिए एमएसएमई के लिए वर्तमान एक करोड़ की सीमा को काम करके 10 लाख कर दिया जाए, जिससे कि छोटे उद्योगों को भी इस स्कीम का लाभ मिल सके। आवश्यक अनुमोदनों के साथ रिप्स प्रोफाइल में संशोधन की अनुमति देने वाले एक तंत्र की शुरुआत की जानी चाहिए।
लघु उद्योग द्वारा सुझाव दिया गया कि रिप्स 2019 के समान 25 करोड़ से कम के निवेश के लिए पूंजीगत सब्सिडी फिर से शुरू की जानी चाहिए, इससे छोटे निवेश वाले एमएसएमई को अतिरिक्त सहायता मिलेगी और उन्हें राज्य में निवेश करने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। सौर ऊर्जा संयंत्रों में निवेश को संयंत्र और मशीनी में निवेश का हिस्सा माना जाए क्योंकि यह अक्षय ऊर्जा को बढ़ावा देता है। साथ ही उद्योगों में सोलर प्लांट लगाने पर सोलर पर लगने वाली राशि पर 50 प्रतिशत अनुदान दिया जाना चाहिए। शीशम किंकर एवं आम को एग्रीकल्चर प्रोडक्ट की परिभाषा में लेकर माइनर फॉरेस्ट प्रोड्यूस माना जाए, जिससे रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे, पर्यावरण में सुधार होगा, बड़ी संख्या में उद्योग लगेंगे, कलाकारों को संरक्षण मिलेगा जिससे लकड़ी के फर्नीचरों का निर्यात बढ़ेगा और प्रचुर मात्रा में विदेशी मुद्रा का अर्जन होगा। राजस्थान में भी गुजरात की तरह औद्योगिक इकाइयों को फायर सेट से मुक्त किया जाना चाहिए। रिप्स प्रावधानों की व्याख्या पर स्पष्टता प्रदान करने और अस्पष्टता से बचने के लिए एक अग्रिम निर्णय तंत्र शुरू किया जाना चाहिए। .एकल खिड़की सिस्टम और स्वतः अनुमोदन रू 10 करोड रुपए से अधिक की परियोजनाओं के लिए एकल खिड़की सिस्टम प्रणाली लागू की जानी चाहिए। यदि फाइल को निर्धारित समय के भीतर संसाधित नहीं किया जाता है तो एक स्वतः अनुमोदन (ऑटो अप्रूवल ) शुरू हो जानी चाहिए। रिप्स पोर्टल पर ऑटो क्लोजर सिस्टम की समय सीमा 15 दिन से बढ़ाकर 30 दिन की जानी चाहिए। ऐसी रुग्ण औद्योगिक इकाइयां जो एनसीईएलटी के आदेश के कारण दिवाला घोषित हो चुकी है, उन्हें भी रिप्स 2024 के अंतर्गत बिना किसी शर्त के इस योजना का लाभ मिलना चाहिए, साथ ही ऐसी ईकाईयाँ जिन्हें पुनः जीवित करने के लिए चयनित किया गया है उनको भी इस योजना का लाभ मिलना चाहिए। सभी प्रकार की सब्सिडी स्वत डीबीटी से ऑनलाइन भुगतान की जावे विभागों की अधीनता कम से कम हो।
इनके अलावा भी लघु उद्योग भारती द्वारा कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए जिनपर राजस्थान सरकार के मुख्य सचिव वित्त ने गम्भीरता से विचार करने की बात कही है।

