लघु उद्योग भारती – राजस्थान प्रदेश कार्यकारिणी (2025–27): नए नेतृत्व के साथ सशक्त संगठन की ओर अग्रसर
लघु उद्योग भारती – राजस्थान की नवगठित प्रदेश कार्यकारिणी (2025–27) की औपचारिक घोषणा एक अत्यंत गरिमामय एवं प्रेरणास्पद समारोह में की गई, जो संगठन की विचारधारा, उद्देश्य एवं भविष्य की दिशा को और अधिक स्पष्ट करता है। यह ऐतिहासिक क्षण अखिल भारतीय संगठन मंत्री श्री प्रकाश चंद्र जी, अखिल भारतीय अध्यक्ष श्री घनश्याम जी ओझा और निवर्तमान अध्यक्ष श्री बलदेव जी प्रजापति की उपस्थिति में संपन्न हुआ, जो स्वयं संगठन की गहराई और उद्देश्यशीलता को दर्शाता है।
नवगठित प्रदेश कार्यकारिणी में श्री योगेन्द्र कुमार शर्मा को अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह नियुक्ति संगठन के अनुभव, समर्पण और नेतृत्व क्षमता को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। श्री महावीर चौपड़ा (जोधपुर) और श्री पवन गोयल (चित्तौड़) को उपाध्यक्ष एवं प्रांत प्रभारी के रूप में नियुक्त किया गया है, जिससे क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और समन्वय को मजबूती मिलेगी। अन्य उपाध्यक्षों में श्री अनिल अग्रवाल, श्री महेन्द्र खुराना, श्री मुकेशचंद अग्रवाल, और श्रीमती अंजू सिंह जैसे अनुभवी नाम शामिल हैं, जो विविध क्षेत्रों से संगठन को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में सहायक होंगे।
श्री सुधीर गर्ग को महामंत्री, श्री अरुण जाजोदिया को कोषाध्यक्ष तथा श्री राजेश गुप्ता, श्री रवि जाजू, श्री विनय बम्ब और श्री संदीप गुप्ता को संयुक्त महामंत्री जैसे पदों पर नियुक्त किया गया है, जो संगठन के संचालन में सक्रिय भूमिका निभाएंगे और कार्यों को गति प्रदान करेंगे।
इस अवसर पर निवर्तमान अध्यक्ष श्री शांतिलाल जी ने अपने कार्यकाल के अनुभव साझा किए और संगठन के लिए कार्यकर्ताओं के अमूल्य योगदान को सराहा। यह संबोधन संगठन की स्थायित्वपूर्ण संस्कृति और निरंतर विकासशील दृष्टिकोण का प्रमाण था।
इस कार्यक्रम में राजस्थान के तीनों प्रांतों — उत्तर, दक्षिण व पश्चिम — के अध्यक्षों श्री महेन्द्र मिश्रा, श्री बालकृष्ण परिहार और श्री महेश हुरकुट ने अपने-अपने क्षेत्रों में हुए संगठनात्मक कार्यों की रिपोर्ट प्रस्तुत की। उन्होंने सदस्य संख्या बढ़ाने की आगामी योजना और संगठन की जमीनी पहुंच को सशक्त करने की रणनीतियों को साझा किया, जो आगामी एजीएम की तैयारी में सहायक होंगी।
अखिल भारतीय अध्यक्ष श्री घनश्याम जी ओझा ने नवनियुक्त कार्यकारिणी की घोषणा करते हुए सभी से आग्रह किया कि लघु उद्योग भारती की विचारधारा — देश प्रथम, नीतिगत उद्योग दृष्टिकोण — को गांव-गांव और उद्योग-उद्योग तक पहुँचाया जाए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आने वाला कार्यकाल संगठन के विस्तार और प्रभाव को और अधिक व्यापक बनाने का अवसर है।
अखिल भारतीय संगठन मंत्री श्री प्रकाश चंद्र जी का संबोधन अत्यंत प्रेरणादायक रहा। उन्होंने कहा कि लघु उद्योग भारती अन्य संगठनों से अलग सोच के साथ कार्य करती है, जहाँ देश हित सर्वोपरि होता है। उन्होंने बताया कि भारत आज वैश्विक मंच पर जो सम्मान प्राप्त कर रहा है, वह नीतिगत उद्योग दृष्टिकोण, आत्मनिर्भरता और संगठित प्रयासों का ही परिणाम है। इस संदर्भ में उन्होंने यह भी कहा कि कार्यकर्ता ही संगठन की असली ताकत हैं, और इनकी सक्रिय भागीदारी ही संगठन को मजबूती प्रदान करती है।
उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में चल रहे विविध कार्यक्रमों में लघु उद्योग भारती की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने का आह्वान किया। साथ ही ‘पंच परिवर्तन’ जैसे विचारों को समझाते हुए उन्होंने कहा कि जब उद्यमी अपने जीवन व कार्यशैली में परिवर्तन लाते हैं — ईमानदारी, पारदर्शिता, गुणवत्ता, सामाजिक दायित्व और राष्ट्रीय सेवा की भावना के साथ — तो समाज और राष्ट्र स्वयं सशक्त होते हैं।
समारोह का समापन आह्वान के साथ हुआ कि संगठन की संरचना को और अधिक प्रभावशाली बनाया जाए, नए सदस्य जोड़े जाएं, और लघु उद्योग भारती को आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में प्रमुख भागीदार के रूप में स्थापित किया जाए। यह कार्यक्रम न केवल नेतृत्व परिवर्तन का प्रतीक था, बल्कि यह संगठन की सुदृढ़ नीतियों, सक्रिय कार्यशैली और राष्ट्र निर्माण की भावना का स्पष्ट संकेतक भी रहा।

