<p>अमृत प्रभात, वाराणसी। जीएसटी लागू करते समय सरकार ने कहा था की एक देश एक कानून व्यवस्था से व्यापारियों, उद्यमियों को लाभ मिलेगा और पूर्व की कई जटिल कर प्रणाली से राहत मिलेगी, परंतु यह हो ना सका और अब यह आलम है कि अस्थिर जीएसटी कानून व अधिकारियो की हठधर्मिता से उद्यमियों एवं व्यापारियों में आक्रोश पनप रहा है। लघु उद्योग भारती काशी प्रांत के उद्यमियों ने संगठन कार्यालय कबीर चौरा वाराणसी में बैठक कर इसपर आक्रोश जताया। राजेश कुमार सिंह अध्यक्ष लघु उद्योग भारती काशी प्रांत ने बताया कि जीएसटी इन पुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) मे नया बदलाव एक समस्या बना हुआ है। पहले कहा गया कि खरीद के इनवॉइस के हिसाब से आईटीसी क्लेम करें, फिर कहा गया 2ए से क्लेम करे, फिर कहा गया 2बी से क्लेम करे, फिर यह सब खत्म करके 37ए लाया गया और कहा जा रहा है की अपनी ई-मेल आईडी देखकर ही आईटीसी क्लेम करे। उन्होंने कहा कि बार-बार इन सभी बदलाव से करदाता परेशान हैं, पिछले साल भरने से चुके हुए टैक्स को भरने के लिए यह आखिरी महीना है, विवरण जिस जीएसटी आर उबी में भरना होता है, पिछले साल से संबंधित यह रिटर्न 30 नवंबर तक भरा जा सकता है। यह मुख्यतः वह टैक्स है जो कर दाताओं ने इनपुट टैक्स क्रेडिट के रूप मे क्लेम कर लिया परंतु अब तक सप्लायर ने सरकार के खजाने में जमा नही किया, इसमें खरीददार की क्या गलती है, उसने सामान खरीदा और जीएसटी रजिस्टर्ड बिल पर टैक्स दिया, इस गलती की सजा तो सप्लायर को भुगतना चाहिए परंतु सरकार खरीदार को दंडित कर रही है। राजेश कुमार सिंह अध्यक्ष लघु उद्योग भारती ने बताया कि वरिष्ठ जीएसटी एवं आयकर अधिवक्ता आलोक खन्ना ने कहा कि इस तरह से सरकार द्वारा जीएसटी में प्रत्येक माह एक के बाद एक दूसरा कानून व्यवस्था लादे जाने से जीएसटी की आसान प्रक्रिया अब और ज्यादा जटिल होती जा रही है, जिससे उद्यमीयों एवं व्यापारियों को परेशानियों से रूबरू होना पड़ रहा है, जिससे अधिवक्ता भी परेशान है की कल कौन सा बदलाव सरकार द्वारा किया जाएगा कोई नही जानता। दिनेश गुप्ता अध्यक्ष वाराणसी ने बताया कि यदि इसी तरह उद्यमी प्रताड़ित होते रहे तो संगठन देशव्यापी आंदोलन के लिए बाध्य होगा, कार्यक्रम में वरिष्ठ अधिवक्ता आलोक खन्ना, ज्योति शंकर मिश्रा, सर्वेश श्रीवास्तव, अरुण सिंह, सुभाष सिंह, रणधीर सिंह, गुलज़ारी लाल गुप्ता सहित उद्यमी शामिल रहे।</p>