<p>लखनऊ। प्रदेश में औद्योगीकरण को बढ़ावा देने के लिए उद्यमियों को बड़ी राहत दी गई है। इसके तहत 577 नियमों को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया गया है। अभी तक इन नियमों के तहत उद्यमी को छह महीने से एक साल तक जेल का प्रावधान था. जिसे खत्म कर पेनाल्टी में तब्दील कर दिया गया है। इसके अलावा 2978 नियमों को डिजिटल कर दिया गया है। इससे उद्यमियों की दफ्तरों तक भागदौड़ बचेगी और वे उत्पीड़न से बचेंगे। औद्योगिक विकास विभाग ने शासन द्वारा कारोबारी राहत से जुड़ी प्रगति के जवाब में रिपोर्ट भेजी है।</p><p>लंबे समय से विभिन्न कारोबारी संगठन बेवजह मुसीबत बने नियमों को खत्म करने या सरल करने की मांग कर रहे थे। जब से केंद्र में भानपा सरकार आई, कंप्लायंस खत्म करने की प्रक्रिया शुरु हो गई थी। प्रदेश सरकार भी पिछले कई वर्ष से इस दिशा में काम कर रही थी। प्रत्येक विभाग से अनुपयुक्त नियम और नियामक अनुपालन (कम्प्लांयस) की सूची मांगी गई थी। करीब 22 विभागों ने शासन को ऐसे नियमों और अनुपालनों का ब्योरा भेजा। जिन पर अध्ययन करने के बाद 4504 अनुपालनों को कम कर दिया गया। इसके अंतर्गत 2978 अनुपालनों को सरल व डिजिटल कर दिया गया है। इनमें से 1528 नियम सरकार और कारोबारियों (जीटूबी) से संबंधित हैं। 1450 नियम उपभोक्ताओं को राहत पहुंचाने वाले हैं।</p><p>उल्लेखनीय है कि ऐसे हजारों नियम उद्योगों की रफ्तार में 'स्पीड ब्रेकर' का काम रहे थे। इन अनुपालनों के कारण उद्योगों से जुड़ी एक फाइल फाइनल होने का औसत समय 6 महीने से 24 महीने तक था। इन नियमों के खात्मे के बाद ये समय घटकर 72 घंटे से 300 घंटे पर आ गया है।</p><p>इन विभागों से खत्म हुए नियम</p><p>कृषि, बेसिक शिक्षा, वाणिज्य कर, सहकारी, धर्मार्थ कार्य, ऊर्जा, आबकारी, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन, उच्च शिक्षा, गृह विभाग, आवास, सिंचाई एवं जल संसाधन, न्याय, विधिक माप विज्ञान, पंचायती राज, राजस्व, चीनी उद्योग, गन्ना विकास, प्राविधिक शिक्षा, परिवहन और नगर विकास।</p>