लघु उद्योग भारती के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एडवोकेट अरविंद धूमल ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत केंद्रीय बजट 2025 में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र पर विशेष जोर दिया गया है, इसे भारतीय अर्थव्यवस्था के दूसरे इंजन के रूप में मान्यता दी गई है। उक्त जानकारी देते हुए मास कम्युनिकेशन बोर्ड उत्तर पश्चिम क्षेत्र प्रमुख विक्रान्त शर्मा ने बताया कि लघु उद्योग भारती, जो भारत में सूक्ष्म, व लघु उद्यमों का प्रतिनिधित्व करने वाला प्रमुख संगठन है, ने केंद्रीय बजट में शामिल उपाय भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ को मजबूत करने के प्रति सकारात्मक इरादे को दर्शाते हैं। उक्त बजट में लघु उद्योग भारती के सुझावों को मिला समुचित समर्थन मिला है हालांकि, हम सरकार से आग्रह करते हैं कि इन नीतियों को छोटे व्यवसायों के लिए वास्तविक लाभ में प्रभावी रूप से बदलने के लिए और कदम उठाएं। उक्त बजट में सूक्ष्य और लघु उद्योग के लिए क्रेडिट गारंटी कवर 5 करोड़ से बढ़ाकर 10 करोड़ करने, स्टार्टअप के लिए 10 करोड से 200 करोड तक की सीमा, 27 फोकस क्षेत्रों में आत्मनिर्भर भारत के लिए महत्वपूर्ण ऋण पर 1 प्रतिशत गारंटी शुल्क के साथ साथ एक नई योजना के तहत सूक्ष्म उद्यमों के लिए 5 लाख की सीमा के साथ अनुकूलित क्रेडिट कार्ड जारी किए जाएंगे। पहले वर्ष में 10 लाख ऐसे कार्ड जारी किए जाएंगे। श्री धूमल ने कहाकि पहली बार के उद्यमियों के लिए एक विशेष योजना के तहत पांच लाख पहली बार के महिला, अनुसूचित जाति (एस सी), और अनुसूचित जनजाति (एसटी) उद्यमियों को अगले पांचवर्षों में 2 करोड़ तक के टर्म लोन प्रदानकिए जाएंगे। यहकदम महिला और समाज के कमजोर वर्ग के नए उद्यमियों को प्रेरित करने में मदद करेगा। उत्पाद विकास योजना के तहत फुटवियर और चमड़ा क्षेत्र के लिए, खिलौनों के क्लस्टर व वैश्विक केंद्र बनाने के लिए राष्ट्रीय एक्शन प्लान, राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी, उद्यमिता और प्रबंधन संस्थान की स्थापना के माध्यम से खाद्य प्रसंस्करण उद्योग का समर्थन, उद्यमिता और प्रबंधकीय कौशल को बढ़ाने के लिए कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। केंद्र सरकार ने भारत को विश्व गुरु के साथ-साथ विश्व की तीसरी अर्थव्यवस्था बनने का जो लक्ष्य रखा है इसके लिए एम एस एम ई सेक्टर को मजबूत करना आवश्यक है कुटीर, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों की प्रगति व बेहतरी के लिए बजट में उक्त सेक्टर को मजबूत करने के लिए कारगर कदम उठाए गए है। इन्ही के माध्यम से रोजगार सृजन, उद्योग व अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। देश भी सतत विकासशील बनेगा भारतीय निर्यात में भी एमएसएम ई का योगदान 45 प्रतिशत से भी अधिक है, सरलीकरण की प्रक्रिया से देश आत्मनिर्भर होने के साथ साथ हर क्षेत्र में अधिकाधिक निर्यात करने वाला देश बनेगा।