केंद्र सरकार ने भूजल दोहन करने वाले उद्योगों को बड़ी राहत दी है। इसके लिए लघु उद्योग भारती (LUB) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और केंद्रीय भूजल प्राधिकरण के अधिकारियों का आभार जताया है।
LUB के राष्ट्रीय अध्यक्ष घनश्याम ओझा ने बताया कि गजेंद्र शेखावत के निर्देश पर केंद्रीय भूजल प्राधिकरण ने 1 लाख लीटर प्रतिदिन भूजल दोहन करने वाले उद्यमियों को 1 साल के लिए पर्यावरण क्षतिपूर्ति सेस से मुक्त कर दिया है। आदेश जारी होने के 3 महीने के अंदर आवेदन करने वाले उद्यमियों को सेस में 80 प्रतिशत, 6 महीने में आवेदन करने वाले को 60 प्रतिशत, 9 महीने में आवेदन करने वाले को 30 प्रतिशत और सालभर में आवेदन करने वाले को 20 प्रतिशत की छूट मिलेगी। साथ ही जिन उद्योगों में लवणीय जल (खारे पानी) का उपयोग किया जाता है, उन उद्योगों को सेस में 100 प्रतिशत छूट प्रदान होगी। इस आदेश से पूरे देश में भूजल दोहन करने वाले उद्यमियों को फायदा होगा। घनश्याम ने बताया कि पिछले दिनों LUB ने कई बार इस विषय पर गजेंद्र सिंह शेखावत से चर्चा की थी।
प्राधिकरण के अधिकारियों से मीटिंग कर समस्या साझा की थी और सेस से लघु और सूक्ष्म उद्योगों को राहत सुनिश्चित करने के लिए निवेदन किया था।
इंडस्ट्री में बिजली के बाद पानी की सबसे ज्यादा खपत
औद्योगिक क्षेत्रों में बिजली के बाद पानी ही है, जिसकी सबसे ज्यादा खपत होती है। टेक्सटाइल, कैमिकल, स्टोन, फर्टिलाइजर और होटल इंडस्ट्री में पानी का खूब इस्तेमाल होता है। ये जमीन से पानी निकालते हैं। प्राधिकरण ने 24 सितंबर 2020 को भूजल निकासी के नए नियम नोटिफाई किए थे। जमीन से पानी निकालने वाले उद्योगों ने नए नियम के तहत आवेदन करके भूजल निकासी की अनुमति हासिल की। 2 साल बाद अनुमति के नवीनीकरण के समय तकनीकि कारणों से ज्यादातर लघु और सूक्ष्म उद्यमी नियमों के तहत ठीक से आवेदन नहीं कर पाए। इन पर भारी पर्यावरण क्षतिपूर्ति सेस लगा दिया गया। इससे ऐसे उद्योगों के अस्तित्व पर संकट आ गया। कई उद्यमियों ने तो अनुमति के लिए आवेदन भी नहीं किया। अब सरकार ने राहत दी है, जिसका लाभ उद्यमियों को मिलेगा।- ओम प्रकाश गुप्ता, महामंत्री, लघु उद्योग भारती