हस्तशिल्प निर्यात संवर्धन परिषद (ईपीसीएच) द्वारा 26 जनवरी 2025 तक आयोजित हो रहे जोधपुर के बोरानाडा स्थित ट्रेड फैसिलिटेशन सेंटर (टीएफसी) में हस्तशिल्प एक्सपो (आर्ट फैक्ट्स), जोधपुर-2025 के पहले संस्करण का संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने उद्घाटन किया।
शेखावत ने कहा कि जोधपुर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को एक नई पहचान मिल रही है। इस महत्वपूर्ण पहल से न केवल क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर जोधपुर के हस्तशिल्प को भी नई पहचान मिलेगी। उन्होंने कहा कि राजस्थान में जितना भी हस्तशिल्प निर्माण होता है, उसका 50 फीसदी जोधपुर से आता है। यह तथ्य जोधपुर की प्रतिभा और परिश्रम का प्रमाण है। शेखावत ने कहा कि इस उद्योग को 'ऑरेंज इकोनॉमी' के रूप में एक नई पहचान दी गई है। कृषि क्षेत्र के बाद सबसे अधिक रोजगार सृजित करने का कार्य ऑरेंज इकोनॉमी करती है। आज जोधपुर की पहचान उसके हस्तशिल्प से हो रही है, और यह पहचान आने वाले समय में और मजबूत होगी। बीते दस वर्षों में देश ने जिस तरह का परिवर्तन देखा है, वह हर भारतीय के लिए गर्व का विषय है। आज भारत से एक्सपोर्ट होने वाली हर वस्तु की स्वीकार्यता पूरे विश्व में तेजी से बढ़ रही है। यह हमारे लिए एक सुनहरा अवसर है।
शेखावत ने कहा, हम जिन संभावनाओं के द्वार पर खड़े हैं, वहां से हम पूरे विश्व को चुनौती दे सकते हैं। यह समय है कि हम अपने सामूहिक प्रयासों से जोधपुर और राजस्थान को विकास की नई ऊंचाइयों पर ले जाएं। समारोह में सीओए ईपीसीएच के सदस्य हंसराज बाहेती और रवि के पासी, प्रमुख सदस्य निर्यातक निर्मल भंडारी, राधेश्याम रंगा, डी कुमार, लघु उद्योग भारती के राष्ट्रीय अध्यक्ष घनश्याम ओझा, लेखराज माहेश्वरी, ईपीसीएच के कार्यकारी निदेशक आर. के. वर्मा और जोधपुर और जयपुर क्षेत्र के सदस्य उपस्थित थे। ईपीसीएच के कार्यकारी निदेशक आर. के. वर्मा ने बताया कि वर्ष 2023-24 के दौरान हस्तशिल्पों का कुल एक्सपोर्ट 32,759 करोड़ रुपये (3,956 मिलियन अमेरिकी डॉलर) का हुआ था। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि वर्ष 2023- 24 के दौरान वुडवेयर का कुल एक्सपोर्ट 8038.17 करोड़ का किया गया, इसमें 28.19 फीसदी हिस्सेदारी जोधपुर की थी।