उद्योग और पर्यावरण दोनों साथ-साथ नहीं हो सकते, ऐसा सभी मानते हैं, लेकिन इसे गलत सिद्ध किया है व्यावर नगर की लघु उद्योग भारती शाखा ने। शुक्रवार को अवसर था राजस्थान को औद्योगिक नगरी ब्यावर, जो 2 वर्ष पूर्व ही जिला घोषित हुआ है। उसी ब्यावर को धरती पर रीको द्वारा प्रदान किये गये भूखण्डों पर विकसित की गई 6 सरित वाटिकाओं के लोकार्पण कार्यक्रम का।
उद्योग हित राष्ट्र हित की भावना के साथ-साथ हरित पर्यावरण जैसे महत्वपूर्ण प्राथमिक उद्देश्यों को पूर्ण करते हुए कार्य कर रही संस्था लघु उद्योग भारती की ब्यावर नगर की मुख्य एवं महिला शाखा के तत्वाधान में लघु उद्योग भारती बाटिकाओं के लोकार्पण के श्रृंखलाबद्ध कार्यक्रम का। 15 अगस्त शुक्रवार को दोपहर 2:30 बजे से प्रारम्भ हुए इस कार्यक्रम में कई आयाम प्रस्तुत किये। सर्वप्रथम रिको प्रथम में बीएसएनएल ऑफिस के पीछे स्थित वाटिका संख्या 6 का लोकार्पण संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष घनश्याम ओझा एवं चित्तौड प्रांतीय अध्यक्ष महेश हुरकट के कर कमलों से सम्मान हुआ। इसी श्रृंखला में वाटिका क्रमांक 5, 4 व 3 का लोकार्पण सम्पा हुआ। इस अवसर पर प्रांतीय उपाध्यक्ष रवि जाजू भीलवाडा, एस. पी. इंबर भीलवाडा, बिजयनगर इकाई अध्यक्ष विमात भमानी सहित अज्जमेर, किशनगढ़ इकाई के कई पदाधिकारी भी उपस्थित रहे। पूर्व में लोकार्पण हो चुकी वाटिका क्रमांक 1 व 2 का सभी ने स्वमूहिकता के साथ अवलोकन किया। सभी ने इन हरित वाटिकाओं की विकास यात्रा को सुनकर और प्रत्यक्ष देखकर मुक्त कंठ से प्रशंसा की। कार्यक्रम संयोजक हेमंत रांका ने बताया कि मुख्य कार्यक्रम सायं 4 बजे से रिको द्वितीय में विकसित बाटिका संख्या 3 के समीप स्थित फेक्टरी परिसर में हुआ। जिसमें राष्ट्रीय अध्यक्ष सहित समस्त पदाधिकारी व सदस्यगण उपस्थित हुए। माँ भारती और भगवान श्री विश्वकर्मा के सम्मुख दीप प्रजलन के बाद महिला सदस्यों द्वारा संगठन मंत्र के पाठन के बाद कार्यक्रम विधिवत प्रारम्भ किया गया इकाई अध्यक्ष सचिन नाहर ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में बताया कि केवल वाटिकाओं का लोकार्पण करना ही हमारा उद्देश्य नहीं, वरन पर्यावरण के प्रति एक सकारात्मक सोच और एक स्वर्थक दिशा का बीजारोपण करना है। उद्योगों के साथ केवल पेड़ लगाना ही आवश्यक नहीं, बल्कि उसकी सार-संभाल और प्रकृति से आमजन का जुड़ाव करवाना अति महत्वपूर्ण उद्देश्य है। प्रदेश संयुक्त सचिव व ब्यावर शाखा के वाटिका प्रभारी दीपक शंवर ने सभी वाटिकाओं की अभी तक की विकास यात्रा को एक चलचित्र के माध्यम से समझाना कि चाटिकाएं विकसित करने की प्रथम सोच हमारे पालक अधिकारी प्रकाश अंबुरे के मस्तिष्क में आई।
मासिक बैठक में इस विषय पर आम सहमति होने के बाद इन वाटिकाओं को विकसित करने की योजना बनी। वाटिका क्रमांक 1 जिसका 18 सितंबर 2023 को तत्कालीन जिला कलेक्टर व राष्ट्रीय अध्यक्ष की गरिमामयी उपस्थिति में उदघाटन हो चुका है, की वर्तमान स्थिति जिसमें रंग-चिरंगे फूलों की फूलवारी, विश्राम के लगी बेचें, सुबह शाम सैर करने के लिए पॉथ-वे का चित्रण प्रस्तुत किया गया। इसी बाटिका में जापानी मियावाकी पद्धति द्वारा 1100 पौधों का सपन वृक्षारोपण किया गया है। इसी पाटिका के सफल क्रियान्वयन, हमारी कार्यपद्धति और प्रगति से प्रभावित होकर रीको ने 5 अन्य भूखण्ड इसी तरह विकसित करने हेतु ब्यावर इकाई को निःशुल्क आवंटित कर दिए। वाटिका 3 जो त्रिभुजाकार में है, में जामुन, चोकू और आम जैसे कई फलदार पौधों को विकसित किया गया है। इसी वाटिका में आध्यात्मिक महत्व के रूप में प्रसिद्ध पंचवटी जिसमें बरगद, आंवला, अशोक, पीपल व बेलपत्र होते हैं को विकसित किया गया है। चारिका 4 के ऊपर विद्युत विभाग की हाईटेंशन लाइन होने के कारण इस वाटिका में कम ऊंचाई वाले पेड़-पौधों को लगाया गया है। यहाँ चोकू, फालसे, सीताफल, अमरूद, चम्पा सहित 100 से अधिक पौधे विकसित हो रहे हैं। वाटिका 5 में भी वाटिका क्रमांक 1 की तरह मियावाकी तकनीक से 1100 पौधों का सघन वन लगाया गया है। रिको प्रथम में स्थित वाटिका क्रमांक 6 में छायादार वृक्षों के साथ-साथ एक सुंदर लॉन विकसित किया गया है। सभी वाटिकाओं में बूंद-बूंद सिंचाई के साथ साथ पास में स्थित संस्था सदस्यों की फेक्ट्रियों से पानी की आपूर्ति की जा रही है। इस बहुमान्य एवं उपयोगी जानकारी से उपस्थित आगंतुकगण अत्यंत लाभान्वित हुए। चलचित्र प्रस्सरण के बाद उद्योग व पर्यावरण विषय पर एक परिचर्चा का आयोजन किया गया। जिसमें पी. जी. फोइल्स से पंकज शाह, श्री सीमेंट से अरविंद खींचा, आदित्य पॉलीसेक से दीपक झंवर सहित रिको के क्षेत्रीय प्रवन्धक राहुल बेनीवाल सम्मिलित हुए। परिचचां के दौरान राष्ट्रीय अध्यक्ष ने बताया कि संस्था के अनिवार्य कार्यक्रमों में से एक अनिवार्य कार्यक्रम 'पर्यावरण संरक्षण का है। पर्यावरण को प्लास्टिक मुक्त रखना, हमारा प्राथमिक उद्देश्य है। पंकज शाह ने इसी बात को आगे बढ़ाते हुए बताया कि उनकी स्वयं की फेक्टरी में पयर्यावरण संरक्षण अत्यंत महत्वपूर्ण घटक अन्यथा इसकी अवहेलना करने पर उद्योग के अस्तित्व पर ही संकट पैदा हो जाएगा। अरविंद खींचा ने एक प्रश्न के उत्तर में बताया कि हरियाली हमेशा ही लाभ का सूचक रहा है. हानि का नहीं। इसी तरह दीपक झंवर ने हर पलास्टिक को खराब ना बताते हुए केवल और केवल सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग को खत्म करने पर बल दिया। राहुल बेनीवाल ने अपने उद्बोधन में इन बाटिकाओं की विकास यात्राओं की जमकर प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि वाटिकाओं को बनाना सरल है नहीं है, अपितु उनका रख-रखाव अत्यंत कठिन है लेकिन लघु उद्योग भारती ने इस रख-रखाव का भी सफल क्रियान्वयन कर सभी के लिए प्रेरणा का कार्य किया है। परिचचों के बाद प्रांतीय अध्यक्ष महेश हुरकट कहा कि ब्यावर इकाई ने पूरे अंचल में जो अग्रसर की भूमिका निभाई है, यो प्रशंसनीय और इसके लिए कार्यकारिणी के सभी सदस्य बधाई के पात्र है साथ ही उन्होने सदस्यता पखवाड़े के तहत पूरे चित्तौड़ प्रांत में सबसे कम समयावधि में अपने लक्ष्य को पूर्ण करने पर ब्यावर इकाई को साधुवाद प्रेषित किया। राष्ट्रीय अध्यक्ष ने अपने उद्बोधन में सर्वप्रथम स्याबर इकाई में पुरुष व महिला दोनों इकाई में मिलाकर 'अबकी बार 400 पार' सदस्य संख्या होने पर हर्ष व्यक्त किया। लघु उद्योग भारती संस्था का संक्षिप्त परिचय देते हुए उन्होने बताया कि आज हम देश के 600 जिलों में अपनी उपस्थिति रखते हुए 1050 इकाइयों के साथ 60000 से अधिक सदस्य संख्या बल के साथ विश्व का सबसे बड़ा गैर सरकारी औद्योगिक संगठन है। जहां बिच में 100 वर्षों से अधिक समय से कुछ संस्थाएं उद्योग क्षेत्र के लिए कार्य कर रही है, इस मुकाम तक कोई नहीं पहुँच पाया है और चूंकि हमारा सदस्य संख्या का दायरा अत्यंत विस्तृत होने के कारण हम उद्योग और राष्ट्र हित दोनों को समान भार देते हुए सरकारी नौतियों बनवाने में सफल सिद्ध हो रहे हैं।
अमेरिका टैरिफ प्रणाली के ऊपर जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि हम निर्यात करने वाले व्ययमियों के लिए एक सरकारी राहत पैकेज की घोषणा करवाने में सकारात्मक भूमिका निभा रहे हैं। जिसकी शीघ्र ही घोषणा की जा सकती है। आगामी सितंबर माह में होने जा रहे राष्ट्रीय अधिवेशन में वाटिकाओं को विकास यात्रा से देश की अन्य इकाइयों को भी इस कार्य से प्रेरणा मिले, इस हेतु ब्यावर इकाई की इन बाटिकाओं का एक सूक्ष्म विडियो दिखाया जाएगा, ऐसा आधासन भी उनके द्वारा दिया गया। इस वर्ष नवीन सदस्य बने 17 महिला व 58 पुरुष सदस्यी को भी ओपरना पहना कर सदस्यता प्रमाण देकर सम्मानित किया गया। सभी सदस्यों के सहयोग और सहभागिता के साथ-साथ नवीन सदस्यता प्रभारी विजय मेहता के अधक प्रयासों से यह संभव हो पाया। इस हेतु सभी ने करतल ध्वनि से उनका स्वागत किया। अंत में शाखा सचिव गगन भारद्वाज ने आगंतुक अधितियों के साथ-साथ इस कार्यक्रम को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से भव्य और दिल्य रूप में संपादित करवाने वाले कार्यकर्ताओं को धन्यवाद ज्ञापित किया। इस बात पर बल दिया कि उद्यमी के रूप में होने के कारण हम धन संग्रह में तो प्रयत्नशील है, लेकिन अब आवश्यकता है कि आने वाली पीढ़ियों के लिए हम धन के साथ-साथ वन संग्रह को भी जोड़ें। कार्यक्रम में राम पंजाबी, डॉवरिद शर्मा, राजेन्द्र खंडेलवाल, अतुल बंसल, डॉ राजीव जैन, डॉ गोविंद नाहानी, डॉ जितेंद हरवानी, रवि शंकर पारीक, बनवारी लाल पारीक, अशोक मेवाड़ा के साथ-साथ स्थानीय प्रशासन, उद्यमीगण, भारत विकास परिषद की तीनों इकाइयों के पद्यधिकारी सहित सामाजिक संगठनों के कई प्रतिनिधि और लघु उद्योग भारती के सदस्यगण उपस्थित हुए। राष्ट्रगान के बाद स्नेहभोज के साथ कार्यक्रम सम्मन हुआ। संचालन घेता नाहर एवं दीपक इंवर ने किया।