लघु उद्योग भारती ने सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों के विभिन्न मसलों को लेकर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव लिखे ज्ञापन में इस क्षेत्र की विभित्र समस्याओं के तुरंत निराकरण का आग्रह किया है। लघु उद्योग भारती का कहना है कि सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों के विषयों को पिछले लंबे समय से रखा जा रहा है जिसमें से कुछ विषयों पर निराकरण प्राप्त हुआ है किंतु कुछ विषय अभी भी लंबे समय से लबित पड़े हुए हैं जिसको लेकर संपूर्ण प्रदेश में उद्यमियों के बीच निराशा का वातावरण बना हुआ है।
लघु उद्योग भारती के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष महेश गुप्ता, प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य शिवनारायण शर्मा और विनित जैन ने ज्ञापन में कहा कि मध्य प्रदेश सरकार द्वारा प्रदेश में छोटे-छोटे उद्यमियों पर एफआईआर एवं एनओसी की बाध्यता लागू की गई है। 1 जनवरी से प्रतिदिन के हिसाब से आर्थिक दंड का प्रावधान किया गया है लघु उद्योग भारती यह मांग करता है कि छोटे-छोटे उद्योगों पर यह बाध्यता समाप्त होनी चाहिए एवं इसके नियमों को सरलीकरण करने हेतु प्रदेश स्तर पर एवं जिला स्तर पर औद्योगिक संगठनों से सुझावों को लेकर पुनः इस नियम को लागू करने पर विचार किया जाना चाहिए तब तक इस पर आर्थिक दंड की अनिवार्यता समाप्त की जानी चाहिए।
महेश गुप्ता ने कहा क वर्तमान में प्रदेश में नगर निगम सीमा के अंतर्गत निर्मित औद्योगिक क्षेत्र में संधारण शुल्क लिया जा रहा है एवं दूसरी ओर दोहरा कर के रूप में नगर निगम द्वारा प्रॉपर्टी टैक्स लिया जा रहा है। संगठन द्वारा लंबे समय से प्रॉपर्टी टैक्स खत्म करने की मांग की जा रही है। उन्होंने कहा कि आपने (मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव) भी इसको हटाने का आश्वाशन संगठन को दिया गया था जिस पर अभी तक शासन द्वारा कोई भी नोटिफिकेशन/ आदेश जारी नहीं किया गया है।
उन्होंने कहा कि लघु उद्योग भारती की मांग पर प्रदेश स्तर एवं जिला स्तर पर उद्योग संवर्धन बोर्ड का गठन किया गया था किंतु प्रदेश के प्रत्येक जिले में संवर्धन बोर्ड की प्रतिमाह बैठक नहीं हो रही है जिसे प्रतिमाह कराए जाने हेतु लघु उद्योग भारती मांग करता है एवं जिला स्तरीय संवर्धन बोर्ड में आए विषयों पर प्रदेश संवर्धन बोर्ड द्वारा त्वरित निराकरण प्रदान किया जावे यह भी मांग करता है। इसके अलावा लघु उद्योग भारती ने कई अन्य मांगों का भी जिक्र अपने ज्ञापन में किया है।