जैसे बीमारियों का इलाज अस्पताल करते हैं, ठीक वैसे ही उद्योगों-कंपनियों की परेशानियों-बीमारियों का उपचार महाराष्ट्र के धुले में खुला उद्योजकीय चिकित्सालय कर रहा है। इसने 3 साल में घाटे में चल रहीं या बंद होने की कगार पर पहुंचीं 20 कंपनियों को जीवनदान दिया है। जनवरी 2023 में लघु उद्योग भारती द्वारा शुरू इस उद्योजकीय चिकित्सालय में किसी भी परेशानी के लिए उद्योगों-कंपनियों को कोई फीस नहीं देनी होती। उन्हें यहां सारी मदद बिल्कुल फ्री मिलती है।
जब किसी कंपनी-उद्योग को किसी तरह की परेशानी आती है, तब वे लघु उद्योग भारती के किसी निदेशक, सचिव या अध्यक्ष से संपर्क करते हैं। इसके बाद चिकित्सालय के विशेषज्ञ कंपनी की समस्या सुनते हैं। इसके लिए यहां 350 से ज्यादा सदस्यों का स्टाफ है। इनमें जमीन और संपत्ति, वित्त एवं बैंकिंग, औद्योगिक सुरक्षा, उद्यमिता विकास, पर्यावरण और प्रदूषण, आयात-निर्यात, ऊर्जा जैसे 15 विषयों के विशेषज्ञ शामिल हैं।
निराश होकर कारोबार बंद करने वालों की संख्या घटी
उद्यमियों को अलग-अलग वजहों से अपने कारोबार में मुश्किलें आती हैं। अक्सर एक अकेले उद्यमी के पास सभी समस्याओं को हल करने की क्षमता नहीं होती। लेकिन जब विशेषज्ञों की टीम मिलकर ईमानदार सलाह और अपनत्व भरा मार्गदर्शन देते हैं, तो समस्या आसानी से सुलझ जाती है। इससे निराश होकर अपना कारोबार बंद करने वाले लोगों में कमी आई है।
कारोबारियों और विभागों के बीच समन्वय कर काम कराते हैं
लीज के संबंध में परेशानी आ रही थी। अधिकारी सुन नहीं रहे थे। तब उद्योग चिकित्सालय से संपर्क किया। उन्होंने मुद्रांक विभाग द्वारा जारी शासनादेश की प्रति उपलब्ध कराकर समस्या का हल बताया। -विजय बडजाते, उद्यमी, अहिल्यानगर
बार-बार बिजली जाने से उत्पादन घट गया था। विभाग में शिकायत के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हो रहा था। उद्योग चिकित्सालय’ को अपनी परेशानी बताई। उन्होंने विभाग से तकनीकी समस्या दूर कराई। – कैलाश अग्रवाल, उद्यमी, धुले
जिला उद्योग मित्र समिति की बैठक में अक्सर बीमार (घाटे में चल रहे) उद्योगों के पुनर्वास पर चर्चा होती थी। वहीं से उद्योगों की ‘हेल्थ’ बनाए रखने के लिए यह संकल्पना सूझी। – वर्धमान सिंघवी, अध्यक्ष, लघु उद्योग भारती, धुले