लघु उद्योग भारती काशी प्रांत के उद्यमियों ने मंगलवार को बैठक कर आयकर कानून में एमएसएमई को भुगतान संबंधित नए नियम से उत्पन जटिलता एवं निदान पर चर्चा की।
उद्यमियों ने कहा कि पिछले साल -फरवरी में पेश बजट में माइक्रो एवं स्माल इंटरप्राइजेज की भुगतान समस्या को दूर करने के लिए सरकारी घोषणा के अनुसार आयकर अधिनियम में संशोधन करते हुए क्लास एच को जोड़ दिया गया था। सेक्शन ४३ बी (एच) में भुगतान में देरी पर कारोबारी उस राशि को अपने खर्च में नहीं दिखा सकेंगे और वह राशि उनकी आय मानी जाएगी।
एमएसएमई से माल खरीदने वालो में सभी एमएसएमई शमिल होते है। इसलिए इस नियम से सभी पंजीकृत एमएसएमई प्रभावित हो रहे हैं। कार्यक्रम मे मुख्य अतिथि कर विशेषज्ञ एवं पूर्व अध्यक्ष इनकमटैक्स बार एसोसिएशन, वाराणसी ज्ञान प्रकाश शुक्ला ने कहा कि वित्त मंत्री द्वारा एमएसएमई को त्वरित भुगतान सुनिश्चित करवाने के लिए आयकर अधिनियम की धारा ४३ बी में जोड़े गये गये अनुच्छेद स्वयं में एमएसएमई उद्योग जगत की गले में फांस बन गयी है। उक्त अनुच्छेद के अनुसार एमएसएमई यूनिट से कारोबार करने वाले व्यापारियों को १५ दिन एवं कुछ विशेष परस्थितियों में ४५ दिनो के अंदर भुगतान करने की बाध्यता है। अन्यथा उक्त विलंबित भुगतान व्यापारी या उद्यमी की आय मान ली जाएगी और इसपर आयकर देना पड़ेगा। राजेश कुमार सिंह अध्यक्ष लघु उद्योग भारती काशी प्रांत ने बताया कि माइक्रो एवं स्माल इंटरप्राइजेज को ४५ दिनों के भीतर भुगतान करने की अनिवार्यता से कारोबारी पंजीकृत एमएसएमई उद्यमी से कारोबार करने से कतराने लगे हैं। जबकि यह नियम माइक्रो एवं स्माल इंटरप्राइजेज की भुगतान समस्या को दूर करने के लिए लाया गया है। ऐसे में ४५ दिनो की बाध्यता को समाप्त कर ९० दिनो में भुगतान नियम लागू किया जाना चाहिए। कार्यक्रम में एस पी शुक्ल, आदित्य शुक्ला, राजीव श्रीवास्तव, आनंद वर्मा, दिलीप गुप्ता, आलोक दुबे, राजेंद्र सिंह, नयन गुप्त, ओम प्रकाश आद उपस्थित थे।