केंद्रीय भूजल प्राधिकरण ने उद्यमियों पर लगाई पेनल्टी में छूट प्रदान की है। केंद्रीय जल शक्ति विभाग ने आदेश जारी कर बताया कि प्रतिदिन 100 केएलडी भूजल का दोहन करने वाले उद्योग को एक साल तक पर्यावरण क्षतिपूर्ति पेनल्टी से मुक्ति प्रदान की गई है। आदेश जारी होने के 3 माह के भीतर आहेदन करने वाले उद्यमियों को इस पेनल्टी से 80 प्रतिशत छूट, 6 माह में आवेदन करने वालों को 160 प्रतिशत छूट, 9 माह में आवेदन करने वाले उद्योगों को 30 प्रतिशत छूट व एक साल बाद आवेदन करने वाले उद्योगों को 20 प्रतिशत की छूट दी गई है। इसके अलावा जिन उद्योगों की ओर से लवणीय जल का उपयोग किया जाता है। उन उद्योगों को पेनल्टी में शत प्रतिशत छूट प्रदान की जाएगी।
लघु उद्योग भारती के प्रदेश अध्यक्ष शांतिलाल बालड ने बताया कि संस्था की राष्ट्रीय, प्रदेश कार्यकारिणी ने इस समस्या के निस्तारण के लिए कई बार केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय से मांग की। इस पर मंत्रालय ने यह अधिसूचना जारी की है। 2020 में जल शक्ति मंत्रालय के केंद्रीय भूजल प्राधिकरण ने उद्योगों में भूजल निकासी के नए नियम नोटिफाई किए थे। इसमें छूट देने के लिए लघु उद्योग भारती के केंद्रीय जल शक्ति मंत्री को अवगत करवाने पर उन्होंने उद्यमियों की समस्या को समझते हुए इसके आदेश जारी किए। 2020 में नए नियमों के तहत भूजल दोहन करने वाले उद्योगों को नए नियमों के तहत आवेदन कर अनुमति लेनी होती थी। दो वर्ष बीत जाने के बाद अनुमति के नवीनीकरण के समय तकनीकी कारणों से अधिकांश लघु व सूक्ष्म उद्यमी नियमों के तहत आवेदन नहीं कर पाए। इससे पर विभाग ने इन पर पर्यावरण क्षति पूर्ति पेनल्टी लगाई। इससे उद्योगों पर संकट आ गया था। पेनल्टी राशि को हटाने पर अब उद्यमी पुनः आवेदन कर सकेंगे। इससे जोधपुर, पाली, बालोतरा, बिठुजा समेत करीब 1500 कारखानों में से 1200 कारखाना संचालकों को लाभ मिलेगा। इस पर लघु उद्योग भारती के राष्ट्रीय अध्यक्ष घनश्याम ओझा, प्रदेशाध्यक्ष शांतिलाल बालड़, महेद्र श्रीश्रीमाल, पाटोदी नरेश, प्रवीण महाजन, डूंगर चंद सालेचा, मुकेश गोयल, विनोद सिंघवी, संदीप ओस्तवाल ने भूजल प्राधिकरण का आभार ज्ञापित किया।