देश के लघु उद्योगों को मजबूती और नई पहचान दिलाने के उद्देश्य – से वर्ष 1994 में स्थापित लघु उद्योग भारती आज देशभर में एक सशक्त मंच बन चुका है। वर्तमान – में संस्था 581 जिलों में 1 हजार से अधिक इकाइयों के साथ सक्रिय है। इनमें 55 हजार से ज्यादा उद्यमी सदस्य जुड़े हुए हैं।
किशनगढ़ इकाई अध्यक्ष उमेश गोयल ने बताया कि संस्था का मुख्य उद्देश्य लघु उद्योगों की समस्याओं को स्थानीय, प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर उठाना है। उद्योग स्थापित करने से लेकर उसके संचालन में आने वाली – चुनौतियों जैसे बिजली, प्रदूषण – नियंत्रण, रिको, लोन आदि मुद्दों को हल करवाने के लिए नीति बदलावों की पहल संस्था द्वारा की जाती है। वर्ष 2017 में जीएसटी लागू होने पर संगठन ने कई विसंगतियों के समाधान के लिए सरकार को – समय-समय पर सुझाव दिए और कई बदलाव करवाने में सफलता पाई।
इंडस्ट्रियल फेयर शो: 2010 में आईएमएस (इंडिया मैन्युफैक्चरिंग शो) फाउंडेशन की स्थापना कर लघु उद्योगों को प्रदर्शनी और सेमिनार के जरिए प्रोत्साहित किया गया। अब तक बैंगलोर में 6 सफल संस्करण हो चुके हैं। 7वां कार्यक्रम 6 से 8 नवंबर 2025 में होगा।
संस्था इस तरह करती है कार्य : संस्था का संचालन अखिल – भारतीय कार्यसमिति और कार्यकारिणी के माध्यम से होता है। अखिल भारतीय, प्रदेश, अंचल, संभाग और इकाई स्तर पर हर दो साल में चुनाव करवाकर पदाधिकारी मनोनीत किए जाते हैं।
इसलिए हुई संगठन की स्थापना.. 90 के दशक में एलपीजी (उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण) की लहर ने भारतीय बाजार में विदेशी कंपनियों की एंट्री को आसान बना दिया। इसके चलते देशी उद्योगों को प्रतिस्पर्धा में कठिनाई होने लगी। इस परिस्थिति को देखते हुए 1994 में विश्वामित्र बहल की अध्यक्षता में सुदर्शन सरीन, अनंत राव भिड़े, कृष्ण आग्रेय, विश्राम जामदार, शंकर तामहन और दयानंद खरे ने लघु उद्योग भारती की स्थापना की। संस्था का मानना है। है कि लघु उद्योग रोजगार सृजन, जीडीपी और निर्यात में प्रमुख में प्रमुख योगदानकर्ता हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा और सतत विकास जरूरी है।
महिला उद्यमिता को भी प्रोत्साहन
वर्ष 2010 से संस्था महिला उद्यमिता को बढ़ावा दे रही है। आज 51 महिला इकाइयों में 4,521 सदस्य सक्रिय हैं। महिलाओं के उत्पादों को बाजार दिलाने के लिए 'स्वयंसिद्धा' नाम से देशभर में प्रदर्शनियां आयोजित की जाती हैं। 5 से 8 फरवरी 2026 को जयपुर में पहली बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लघु उद्योग भारती के सहयोग से प्रदर्शनी होगी, जिसमें 65 देशों के उद्यमी भाग लेंगे।
कौशल विकास केंद्र…. स्किल्ड मैनपावर की जरूरत को देखते हुए जयपुर में 35 करोड़ की लागत से सोहन सिंह स्मृति कौशल विकास एवं प्रशिक्षण केंद्र शुरू किया गया है, जिसमें 1,000 छात्रों के प्रशिक्षण की क्षमता है। इसी तरह जोधपुर सहित 35 अन्य स्थानों पर कौशल विकास कार्य चल रहा है।
एमएसएमई मंत्रालय का गठन… लंबे समय तक सरकार का फोकस बड़े उद्योगों पर रहा। लघु उद्योग भारती के प्रयासों से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों के लिए अलग मंत्रालय बना। 2006 में एसएमई एक्ट को एमएसएमई एक्ट में बदलवाया गया। सरकारी खरीद में 20% आरक्षण लघु उद्योगों के लिए सुनिश्चित हुआ।
यहां संपर्क करें
संस्था से जुड़ने या अपनी समस्याएं बताने के लिए किशनगढ़ इकाई अध्यक्ष – उमेश गोयल (मो. 98290-69809) पर संपर्क किया जा सकता है।