देश में पर्यावरण के लिये समस्या बनी पराली अब लकड़ी का विकल्प बनेगी। यह संभव हुआ है भोपाल एम्प्री द्वारा विकसित नई पेटेंटेड नवीन तकनीक से मंगलवार । सीएसआईआर-एम्प्री भोपाल, दिल्ली ने उत्पादकता परिषद एवं लघु उद्योग भारती न बीच हुई बैठक में इसको साझा किया गया। सीएसआईआर-एम्प्री के निदेशक डॉ. अवनीश कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि ये पराली-आधारित लकड़ी-वैकल्पिक उत्पाद किसानों और स्टार्ट-अप के लिए वास्तविक गेम चेंजर बन सकते हैं, उन्हें एक नया आर्थिक आउटलेट प्रदान कर सकते हैं और रोजगार पैदा करने में मदद कर सकते हैं।
दरअसल पराली पर ध्यान केंद्रित करते 7 हुए सीएसआईआर-एडवांस मैटेरियल्स एंड प्रोसेस रिसर्च इंस्टीट्यूट (एम्प्री), भोपाल हाइब्रिड ग्रीन कंपोजिट के निर्माण के लिए पराली (धान के पुआल व ठूंठ) और गेहूं के भूसे के बड़े पैमाने पर पुनर्चक्रण के लिए एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पेटेंटेड नवीन तकनीक विकसित की है। इस नवाचार ने निर्माण सामग्री अनुप्रयोगों के लिए लकड़ी के विकल्प के विकास के लिए नई सामग्रियों को पेश करने का मार्ग प्रशस्त किया है। इस नवीन ग्रीन हाइब्रिड पदार्थ का उपयोग लकड़ी के विकल्प के रूप में और बुनियादी ढांचे और घरेलू अनुप्रयोगों में उपयोग के लिए मध्यम घनत्व वाले बोर्डों के विकल्प के रूप में भी किया जा सकता है। सीएसआईआर-एम्प्री के निदेशक डॉ. अवनीश ने बताया कि प्रौद्योगिकी पैकेज व्यावसायिक स्तर के विनिर्माण के लिए तैयार है। विकसित उत्पाद में निर्माण अनुप्रयोगों के लिए पार्टिकल बोर्ड की तुलना में बेहतर गुण हैं। यह तकनीक विभिन्न कृषि- औद्योगिक कचरे जैसे धान के पुआल, गेहूं के भूसे, संगमरमर के कचरे, लाल मिट्टी, फ्लाई ऐश, अन्य खनिजों और धातुकर्म कचरे के प्रभावी उपयोग के लिए एक संभावित समाधान भी प्रदान करती है।
सीएसआईआर-एम्प्रीकी विकसित तकनीक पराली जलाने की पर्यावरणीय समस्या का एक हरित समाधान है और सरकार की आत्मनिर्भर भारत पहल में योगदान करती है। क्योंकि यह रोजगार पैदा करती है और किसानों की आजीविका में सुधार करती है। इसके साथ ही व्यावसायीकरण के लिए तैयार तकनीक उच्च-गुणवत्ता और चमकदार फिनिश कंपोजिट का उत्पादन करती है, जो एक बहुलक प्रणाली में 60 प्रतिशत पराली का उपयोग करती है। नवोन्मेषी सम्मिश्र सामग्री में सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे कि दरवाजे, फाल्स सीलिंग, वास्तुशिल्प दीवार पैनल, विभाजन, फर्नीचर आदि के लिए यह उपयोग की जाएगी।