पारंपरिक भारतीय आहार मोटे अनाज के मानव स्वास्थ्य के लिए फायदे और उपयोगिता बताने के उद्देश्य से लघु उद्योग भारती महिला इकाई जोधपुर महानगर की ओर से मिलेट्स की उपयोगिता पर एक दिन की वर्कशॉप रातानाडा स्थित श्री अन्नम् रसोई में रखी गई।
महिला इकाई अध्यक्ष मोना हरवानी ने कहा कि 2023 को मोटा अनाज वर्ष घोषित करने के बाद मिलेट्स का उपयोग भी बढ़ा है। मिलेटस् से विटामिन, मिनरल्स्, प्रोटीन और फाइबर के अच्छे स्त्रोत मिलते हैं इसलिए ये पारंपरिक भारतीय आहार का मुख्य हिस्सा बन चुका है। महिला इकाई सदस्य एवं ट्रेनर भावना शर्मा ने बताया कि मोटे अनाज से बने शुद्ध सात्विक, शाकाहारी, ग्लूटेन मुक्त मोटे अनाज शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं एवं शरीर को स्वस्थ बनाने में मददगार है। ये मोटा अनाज न केवल शरीर के लिए फायदेमंद है, बल्कि पर्यावरण के लिए भी अच्छा होता है क्योंकि इन्हें उगाने में कम पानी और कम रासायनिक उर्वरक की जरूरत होती है। साथ ही, ये अनाज आज एक बेहतर आय का स्रोत बन चुके हैं। वर्कशॉप में इसे बनाने के प्रयोगात्मक विधियां बताते हुए मेंबर्स ने इनके बने फूड का लुत्फ उठाया। कार्यक्रम में उपाध्यक्ष इंदुबाला अग्रवाल, कोषाध्यक्ष शिल्पा अग्रवाल, सहसचिव नलिनी बंसल, कार्यकारिणी सदस्य मनीषा शर्मा, निधि सिंह, मीनाक्षी हर्ष, सुधा गर्ग, भावना मोटवानी, सदस्य चंद्रकांता रजनी बरवानी, मालती मनसुखखानी, शीतल अग्रवाल, चंद्रा मित्तल भी मौजूद रहे।