राज्य सरकार की ओर से आयोजित हुए राइजिंग राजस्थान कार्यक्रम में हुए एमओयू को जमीनी धरातल पर उतारने के लिए सरकार सतत रूप से प्रयत्नशील है और इसके सकारात्मक परिणाम भी सामने आए हैं। लघु उद्योग भारती ने राज्य सरकार के प्रयासों की सराहना की है और उम्मीद जताई कि जल्द ही प्रदेश में के विकास के साथ ही रोजगार के नए आयाम स्थापित होंगे।
लघु उद्योग भारती के राष्ट्रीय अध्यक्ष घनश्याम ओझा ने बताया कि सरकार ने अपने पहले ही वर्ष में राइजिंग राजस्थान का आयोजन किया और लगभग 35 लाख करोड़ रुपए के एमओयू किए गए। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम में जिन उद्यमियों ने राज्य सरकार के साथ एमओयू किया उन सभी एमओयू को धरातल पर उतारने के लिए राज्य सरकार की ओर से लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। ओझा ने बताया कि पहली बार राज्य सरकार ने प्रदेश के औद्योगिक ढांचे को तैयार करने के लिए एमएसएमई नीति, निर्यात संवर्द्धन, एक जिला-एक उत्पाद, पर्यटन इकाई, स्वच्छ ऊर्जा, खनिज, एम-सेण्ड और क्लस्टर विकास की नई नीतियां तैयार की है, जिसमें विभिन्न औद्योगिक संगठन से आए प्रस्ताव को सम्मिलित करते हुए औद्योगिक वातावरण बनाने का प्रयास किया गया है। ओझा ने कहा कि सरकार ने बजट में एमएसएमई उद्योग को सशक्त बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की है, जिसका लाभ इस सेक्टर को मिलेगा। ओझा ने राज्य सरकार से मांग की है कि यदि राज्य सरकार उद्यमियों को सीधे जमीन आवंटित करें तो निश्चित रूप से उद्यमियों को लाभ होगा। उन्होंने राज्य सरकार से मांग की है कि पुराने औद्योगिक क्षेत्र में 80% जमीनों का सीधा आवंटन उद्यमियों को किया जाए और नए औद्योगिक क्षेत्र में शत प्रतिशत जमीन राज्य सरकार उद्यमियों को सीधे जमीन आवंटित करें तो कई बड़े उद्योग में राजस्थान की ओर आकर्षित होंगे और इससे केवल प्रदेश की अर्थव्यवस्था में सुधार होगा, बल्कि रोजगार के भी कई अवसर उपलब्ध होंगे।