लघु उद्योग भारती ने सहारनपुर विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष संतोष कुमार के खिलाफ विरोध जताते हुए उनके इस्तीफे की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि विवाद उस समय शुरू हुआ जब सहारनपुर विकास प्राधिकरण ने उद्यमी आदेश बिंदल की 15 वर्ष पुरानी फैक्ट्री को अवैध बताकर ध्वस्तीकरण का नोटिस जारी किया। मामला दिल्ली रोड पर विकासाधीन कॉलोनी का है, जिसमें आदेश बिंदल का 1050 गज का प्लॉट बीच में आ रहा है। उद्यमियों का आरोप है कि प्राधिकरण के अधिकारी जेई प्रदीप गोयल और सार्थक शर्मा ने आदेश बिंदल को धमकाया कि वह अपने प्लॉट की रजिस्ट्री सरकारी रेट पर प्राधिकरण को कर दें, जबकि मार्केट रेट उसके वास्तविक खरीदे गए मूल्य से कई गुना अधिक है। जब उद्यमी ने अपनी जमीन रजिस्ट्री कराने से इनकार किया, तो प्राधिकरण ने उनकी फैक्ट्री पर नोटिस जारी कर घ्वस्तीकरण की धमकी दी। लघु उद्योग भारती के मेरठ संभाग के महासचिव अनुपम गुप्ता ने कहा कि या तो प्राधिकरण नोटिस में बताए गए आरोप साबित करे या संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि उद्यमी विरोधी मानसिकता वाले अधिकारी विभाग के पद पर बने नहीं रहेंगे।
उन्होंने कहा कि इस प्रकरण की शिकायत मुख्यमंत्री, उच्च अधिकारियों और लोकायुक्त से की जाएगी। इस मौके पर लघु उद्योग भारती के जिलाध्यक्ष वरुण अग्रवाल, उद्यमी आदेश बिंदल, घनश्याम माहेश्वरी, मुकेश शर्मा, सुशील भारद्वाज, शौर्य जैन, संजय कपूर, अजय शर्मा समेत कई पदाधिकारी और उद्यमी उपस्थित रहे।
वहीं, सहारनपुर विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष संतोष कुमार राय ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि प्राधिकरण की कार्रवाई पूरी तरह नियमों के अनुरूप थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी व्यक्ति की भूमि पर गलत कार्रवाई हुई होती, तो उसे ठोस साक्ष्य के साथ प्रस्तुत किया जाता। उन्होंने कहा कि मौके पर स्वीकृत मानचित्र उपलब्ध नहीं था, इसलिए कार्रवाई नियमानुसार की गई। उपाध्यक्ष ने दोहराया कि प्राधिकरण पर लगाए गए सभी आरोप प असत्य और तथ्यहीन हैं। उन्होंने कहा कि वे सहारनपुर विकास प्राधिकरण के दरवाजे सभी नागरिकों के लिए खुले हैं और किसी को भी अपनी समस्या के समाधान हेतु स कार्यालय में आकर संपर्क करने का अवसर ए है। उद्यमियों और प्राधिकरण के बीच जारी रु विवाद ने क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है। रु स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि इस उ प्रकार के विवादों से उद्यमियों के लिए भय व का माहौल बनता है, जबकि प्राधिकरण ने तु स्पष्ट किया कि उनकी कार्रवाई पूरी तरह पारदर्शी और नियमों के अनुरूप रही है।