राजस्थान सरकार की ओर से बजट पूर्व औद्योगिक संघों की बैठक में लघु उद्योग भारती की ओर से अखिल भारतीय अध्यक्ष घनश्याम ओझा, प्रदेश अध्यक्ष शांतिलाल बालड़ एवं जयपुर प्रांत अध्यक्ष सुधीर गर्ग ने भाग लेकर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, उपमुख्यमंत्री व वित्तमंत्री दीयाकुमारी, उद्योगमंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़, उद्योग राज्यमंत्री केके विश्नोई को अनेक सुझाव सौपें गए हैं।
यह सौंपे सुझाव
▶ रीको की ओर से नीलामी के बजाय 90 प्रतिशत भूमि आरक्षित दर पर पहले आओ पहले पाओ की तर्ज पर दी जाए।
▶ सभी औद्योगिक क्षेत्र मे सीवरेज की व्यवस्था की जाए।
▶ प्रवासी मजदूरों का पलायन रोकने के लिए रीको क्षेत्र में अन्नपूर्णा रसोई, शौचालय, मेडिकल डिस्पेसरी की व्यवस्था की जाए।
▶ भूमि रूपान्तरण के नियम सरल किए जाए।
▶ राजस्थान के कच्चे खनिज बाहर जा रहे है। टाइल्स के उद्योग प्रदेश में ही लगे, इसके लिए गैस व सस्ती बिजली की व्यवस्था की जाए।
▶ रंगाई छपाई के लिये कपड़ा महाराष्ट्र से आ रहा है। प्रदेश में ही कपड़ा बनाने के उद्योग लगे. इसके लिए सस्ती बिजली की व्यवस्था की जाए।
▶ सोलर ऊर्जा को प्रोत्साहन देने के लिए उपरी (कैप) सीमा हटाई जाए। कैपटिव पॉवर का ट्रासंमिशन चार्जेज 1.80 से प्रति यूनिट से घटाकर 1.00 प्रति यूनिट किया जाए।
▶ बिजली विभाग द्वारा 50 वर्ष से विद्युत कैटेगरी में बदलाव नहीं किया है। छोटे उद्योगों की सीमा 25 एचपी से बढ़ाकर 60 एचपी व मध्य उद्योग की सीमा 61 एचपी से बढ़ाकर 250 एचपी तक की जाए।
▶ पर्यावरण अनापति के नियमों का सरलीकरण किया जाए।
▶ बाहर के निवेशकों को आकर्षित करने के लिए प्रत्येक प्रोजेक्ट का नोडल ऑफिसर तय किए जाएं और नोडल ऑफिसर ही सभी विभागों से समन्वय करे।
▶ बार-बार लगने वाले फ्यूल सरचार्ज को खत्म किया जाए।
▶ निर्यात प्रोत्साहन के लिए 2 से 2.5 प्रतिशत प्रोत्साहन दिया जाए।
▶ शहर में आबादी व परिवहन का दबाव कम करने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में लगने वाले उद्योगों को विशेष पैकेज दिया जाए।
▶ गौशालाओं को स्वावलंबी बनाने के लिए गौ उत्पादों के प्रोत्साहन की विशेष योजना बनाई जाए।
▶ प्रदेश के उत्पादों को प्रोत्साहित करने के लिए एक उत्पाद एक तहसील योजना को मूर्त रूप दिया जाए।
▶ रॉयल्टी की दरें समान करने के साथ ही मकराना में रॉयल्टी स्लैब से हटाकर प्रदेश के अन्य शहरों की तरह ब्लॉक किया किया जाए। अवैध खनन रोकने के लिए रॉयल्टी दरें कम की जाए।
▶ बरसात के समय खानों में खरबों लीटर पानी भर जाता है। इस पानी का संरक्षण कैसे हो. इसकी योजना बनाई जाए।