पश्चिम राजस्थान उद्योग हस्तशिल्प उत्सव में मनोरंजन के लिए पहली बार सबसे महंगे टेंडर पर झूले लगे लगे है। पिछले कई सालों से लग रहे मेले में सबसे ज्यादा इस बार झूले की रेट गई। मेला आयोजक ने बताया कि मनोरंजन के लिए विशेष व्यवस्था की गई जिसमें छोटे बच्चों के लिए अलग जॉन बनाया गया। वह बड़े लोगे के लिए अलग झूले लगाए गए। उन्होंने कहा कि हर बार मेले में महिलाओं की शिकायत रहती है कि उत्पाती लोगों से परेशानी होती है।
इस परेशानी को दूर करने के लिए बच्चे एवं महिलाओं के लिए अलग से जोन बनाया गया ताकि अपने बच्चों को मेले में आराम से मनोरंजन कर सके। इस बार मेले में एक नई व्यवस्था की गई जिसमें 5 साल की कम उम्र के बच्चों को किड्स जॉन में रखकर वह अपने मेले में खरीदारी कर सकते हैं। उन बच्चों की देखकर जो जॉन बनाया गयाउसकी किड्स जोन में लगी महिलाएं ध्यान रखेगी। हर घंटे की अलग अलग रेट रखी गई है। ताकि मेले में बच्चे गुम हो जाने की परेशानी नहीं झेलनी पड़े।
पांच साल से कम उम्र के बच्चों के लिए पहली बार बनाया किड्स जोन
पहली बार बच्चों के लिए अलग से जॉन बनाया
उत्सव मेले में लगने वाले मनोरंजन झूले में बच्चों के लिए अलग से व्यवस्था की गई। दिनेश गौड़ ने बताया कि हर साल होने वाले मेले में एक ही जगह पर बच्चों से लेकर बड़ों तक के झूले लगाए जाते हैं। इसकी वजह से अव्यवस्थाएं भी होती है। कई बार बच्चे गिर भी जाते हैं। लेकिन पहली बार हमने पहल करते हुए बच्चों के लिए अलग से स्पेशल किड्स जोन तैयार किया गया है। जो बच्चे अपने माता- पिता के साथ आराम से इस झूले के साथ ही मनोरंजन कर सके। बच्चों के लिए ऊंट चकरी, घोड़ा चकरी, मिनी ब्रेक डांस, एरोप्लेन, हेलीकॉप्टर और मिकी माउस इत्यादि झूले लगाए गए।
छोटे बच्चों के लिए अलग से व्यवस्था
उत्सव मेले में खरीदारी करने के लिए आने वाले लोगों के लिए एक अलग से व्यवस्था की गई है। जो 5 साल की कम उम्र के बच्चों को रखने की व्यवस्था की गई। जिससे वह महिलाएं अपने बच्चों को उन्हें सुरक्षित रखकर मेले में खरीदारी कर सकते हैं। तब तक उन बच्चों के लिए किड्स जोन में खिलाया जाता है या मनोरंजन करवाते हैं। ताकि उनके परिजन आराम से मेले में खरीदारी कर सकते हैं। यह इस मेले में पहली बार व्यवस्था की गई। ताकि मेले में अधिकतर बच्चे गुम हो जाने की शिकायत मिलती है। इस शिकायत को विशेष ध्यान रखते हुए यह व्यवस्था की गई है। इन बच्चों को ध्यान रखने के लिए प्रति घंटे के हिसाब से टिकट लगता है।
मेले में झूले की कितनी लगी रेट
मेला परिसर में लगाए जाने वाले मनोरंजन के झूले जो हर बार की भांति इस बार सबसे महंगा झूले का टेंडर लगा। झूले की रेट पिछले कई सालों से 75 लाख थी। इससे ज्यादा कभी टेंडर रेट नहीं गई। लेकिन इस बार मेले में एक करोड़ एक लाख रुपए का टेंडर लगा है। मेले में में झूले लगाने के लिए टेंडर आमंत्रित किया था जो बंद लिफाफा के माध्यम से अलग-अलग झूले लगाने की रेट आई थी। इस बार सबसे महंगी एक करोड़ एक लाख का झूले लगाने का लिफाफा खुला था। | लेकिन ऐसा कभी इतमी रेट नहीं गई। जबकि न्यूनतम राशि 50 लाख ही रखी गई थी।
बड़ों के लिए 50 तरह के झूले
गौड़ ने बताया कि में बड़ों के लिए 50 तरह के झूले लगाए गए है। बड़ों के लिए डबल डिक्स झूला जो पहली बार लगा है। रेंजर झूला, पॉवर झूला, चांद तारा, स्केटिंग कार, सलूंबर, मेरी गो राउंड, ब्रेक डांस, ड्रैगन झूला व नाव सहित विभिन्न प्रकार के झूले लगाए गए। इसके साथ ही जॉइंट व्यू एवं भूत बंगला लगाया गया है।