<p>सान्ध्य टाइम्स ब्यूरो। लघु उद्योग भारती के प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन, श्रम एवं रोजगार मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात की है। इसमें पर्यावरण से जुड़े विषय़ एक्सटेडिड प्रोड्यूसर रेस्पॉन्सिबिलिटी (EPR), माइनिंग, सिंगल यूज प्लास्टिक के विषय पर चर्चा हुई। लघु उद्योग भारती के अखिल भारतीय महामंत्री ओम प्रकाश गुप्ता ने बताया कि मंत्री जी से कारोबारियों और उद्यमियों की मुश्किल साझा की गई है। उन्हें बताया गया कि बवाना में 16000 और नरेला में 4000 फैक्ट्रियों का कलस्टर है। यहां ईएसआई अस्पताल खुलना चाहिए। राजस्थान के खैरथल में भी ईएसआई अस्पताल की जरूरत है। अभी प्राइवेट कंपनियों और फैक्ट्रियों में 21000 रुपये से कम सैलरी के कर्मचारियों को ईएसआई का कार्ड मिलता है। इसकी सीमा बढ़ाई जाए, ESI इंस्पेक्शन की अधिकतम सीमा 6 माह और ESI रजिस्ट्रेशन वापस करने में आने वाली समस्याओं और जोबवर्क पर ESI दायित्व लगने की समस्या के समाधान के लिए मंत्री जी से गुहार लगाई गई है। प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स के अन्तर्गत EPR से स्मॉल स्केल इंडस्ट्री को बाहर रखने की मांग की गई। अभी इसमें रजिस्ट्रेशन जरूरी है, इससे इंस्पेक्टर राज को बढ़ावा मिलता है। रॉ मटीरियल प्रोड्यूसर से ट्रैकिंग होनी चाहिए। मल्टीलेयर प्लास्टिक पर ध्यान दिया जाए। ओम प्रकाश गुप्ता ने बताया कि कई जगहों पर माइनिंग को लेकर जिले स्तर पर क्लियरेंस मिलता था। अब राज्य स्तर पर कर दिया है। इसमें समय और पैसा दोनों खर्च होता है। दरअसल, समस्या ऊपर के स्तर पर नहीं है। अधिकारियों को समस्याओं के निदान पर फोकस करना होगा। विशेष रूप से स्मॉल स्केल इंडस्ट्री को प्रताड़ित होते हैं। मीटिंग में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के चेयरमैन तन्मय कुमार, LUB के अखिल भारतीय संगठन मंत्री प्रकाश चंद, राष्ट्रीय अध्यक्ष घनश्याम ओझा, यूपी के अध्यक्ष मधुसूदन दादू, राजस्थान के अध्यक्ष शांतिलाल बलार, गुजरात से वजुभाई वधासिया और दिल्ली के महामंत्री मुकेश अग्रवाल समेत उद्योग जगत से कई प्रतिनिधि उपस्थित रहे। (प्रस)</p>