सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एम.एस.एम.ई.) के सबसे बड़े राष्ट्रव्यापी संगठन लघु उद्योग भारती ने 1 अप्रैल 2023 से प्रभावी आयकर अधिनियम, 1961 के तहत धारा 43 बी (एच) के वर्तमान कार्यान्वयन पर पुनर्विचार के लिए केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमन को एक ज्ञापन भेजा है, जिसमें विभिन्न सुझाव दिए है ताकि इसका अधिकाधिक लाभ मिल सके और देश की आर्थिकता पर भी कोई दुष्प्रभाव न हो।
लघु उद्योग भारती के अखिल भारतीय अध्यक्ष घनश्याम ओझा, उपाध्यक्ष एडवोकेट अरविंद धूमल, महासचिव ओम प्रकाश गुप्ता ने कहा कि उपरोक्त प्रावधान के कारण, व्यवसाय सूक्ष्म और लघु उद्यमों से बड़े उद्यमों की ओर स्थानांतरित हो रहे हैं, जिससे सूक्ष्म और लघु इकाइयों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है, इसलिए इसे एक वर्ष की अवधि के बाद एम.एस.एम.ई. के लिए लागू किया जाए। धूमल ने कहा कि पारस्परिक सहमति से भुगतान शर्तों में लचीलेपन प्रावधान शामिल किए जाए।
उन्होंने कहा कि हस्तशिल्प निर्यात के व्यापार में विदेशी खरीदार आमतौर पर मामले-दर-मामले के आधार पर 60 से 120 दिनों की क्रेडिट अवधि की मांग करते हैं। इसके अलावा, भारतीय रिजर्व बैंक निर्यात की तिथि से 9 महीने के भीतर निर्यात आय की वसूली की भी अनुमति देता है।