नॉन कंफर्मिंग एरिया का किया जाए वैध, उद्योगों को बिना कट के मिले बिजली

August 26, 2024

लघु उद्योग भारती की ओर से बृहस्पतिवार को सेक्टर 12 स्थित कार्यालय में बैठक का आयोजन किया गया। जिसमें चुनाव को लेकर चर्चा की गई। बैठक की अध्यक्षता जिला अध्यक्ष राकेश कुमार गुप्ता ने की। जबकि फरीदाबाद व पलवल के प्रभारी रवि भूषण खत्री ने किया। अध्यक्ष राकेश कुमार गुप्ता ने बताया कि एमएसएमई उद्यमियों की परेशानियां कुछ वर्षों से अब क्रोनिक रूप लेने लगी हैं। जैसे नॉन कंषामिंग एरिया में चाल रही हजारों कंपनियां सकरपुर, कृष्णा कॉलोनी, डीएलएफ का कुख क्षेत्र इत्यादि उद्यमियों ने कुछ पैसे लगा कर जमीन ली. काम  शुरू आज हजारों लोगों को रोजगार देने से साथ सरकार को करोड़ों रुपए का टैक्स दे रहे हैं। इसके बावजूद इन क्षेत्रों सरकार की ओर से वैध नहीं किया जा रहा है। जिस कारण देश विदेशों की बड़ी कंपनिया ऑडर देने से कतराती हैं, मेरी अपेक्षा सामूहिक रूप से है कि यदि हम चाहते हैं उद्यमी पनपे तो उसके लिए कड़े फैसले लेने होंगे हम जब भी सरकार से बात करते हैं तो कहते हैं हमने अधिकारियों की लगा दी है, लेकिन इससे बात नहीं बनने वाली है जो भी सरकार आए उसे पोल्टिकल फैसले लेने होंगे, सख्ती से पॉलिसी बनवा कर नॉन कफमिग क्षेत्रों को वैध करवाया जाए। फरीदाबाद और पलवल जिला प्रभारी रवि भूषण खत्री ने कहा कि मेरा आने वाली सरकार एक ही निवेदन है कि अपराध पर लगाम लगे। दूसरे राज्यों से यहां आकर बसे लोग कंपनियों में 12-12 घंटे ड्यूटी करते है। उनमें इतनी हिम्मत नहीं होती जो वह कोई अपराध करें। क्राइम वहां ज्यादा हो रहा जिन्हें ठोक से रोजगार नहीं मिल रहा है। यदि जिले की करीब 25 हजार से अधिक एमएसएमई बिजली, आधारभूत ढांगा सहित अनेक समस्याओं से जूझ रहे हैं। अगर शहर की यह समस्या हल हो जाए तो एक बार फिर जिले के उद्योगों को रफ्तार मिलेगी और एशिया के मैनचेस्टर पर परचम लहराएंगे। एफएमडीए और लघु उद्योग भारती के सदस्य संजय अरोड़ा ने कहा कि ओद्योगिक क्षेत्रों के लिए एफएमडीए कई योजनाओं पर काम कर रहा है। वहां का आधारभूत ढांचे को मजबूत करने के साथ नॉन कंफमिंग जोन को वैध करने की दिशा में काम किया जा रहा है। महासचिव अमृतपाल सिंह कोचर ने कहा कि आज उद्योगों के समक्ष सबसे बड़ी समस्या अच्छे कामगार नहीं मिलने की सामने आ रही है। इस दिशा में सरकार को काम करने की जरूरत है साथ ही बिताने की समस्या का निवारण करवाया जाए। कोषाध्यक्ष राजकुमार भगत ने कहा कि सरकार उद्योगों को 24 घंटे बिजली देने की बात तो करती है, बिजली विभाग के सर में भी 23-23 घंटे फाल्ट और ब्रेक डाउन को उसमें नहीं गामिल किया गया है। ब्रेक डाउन और फाल्ट के कारण रोजाना 8 घंटे के कटने पड़ते है। इसका  असर उत्पादन क्षमता पर पड़ता है। इस अवसर पर जिल्ला कार्यालय प्रभारी राम कुमार ने भी अपने विचार रखे।

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