कच्छ की खाड़ी तक पहुंचाने हेतु एक वृहद ड्रेनेज योजना बनाने का सुझाव भी दिया गया।
इसके साथ ही जयपुर, बीकानेर, पाली, भिवाड़ी, जालोर और भीलवाड़ा में लघु उद्योग भारती को भूखंड आवंटन, ब्यावर और भीलवाड़ा में टाइल हब की स्थापना तथा पचपदरा में रीको पेट्रोजोन हब के विकास की आवश्यकता पर बल दिया गया। पर्यावरण स्वीकृति से जुड़ी लंबित फाइलों के शीघ्र निस्तारण, विशेष रूप से SIEEA प्रणाली के माध्यम से प्रक्रिया को सरल और समयबद्ध बनाने का आग्रह किया गया।
प्रतिनिधिमंडल ने माइनिंग क्षेत्र में ड्रोन सर्वे की समीक्षा, आखलियों को नियमित करने, और पेट्रोजोन में छोटे उद्यमियों को वाजिब दरों पर शेड उपलब्ध कराने की मांग भी रखी। इसके अतिरिक्त रिसॉर्ट और होटलों को पूर्ण उद्योग का दर्जा देने, भवन निर्माण पर ब्याज व अनुदान देने, रीको द्वारा आवंटित भूखंडों में उद्योग की प्रकृति बदलने की अनुमति देने, कृषि मंडी टैक्स एवं कृषक कल्याण सेस समाप्त करने, तथा ‘राइजिंग राजस्थान’ के अंतर्गत एमओयू आधारित उद्योगों को व्यावहारिक शिथिलताएं देने संबंधी विषयों पर भी चर्चा हुई।