राइजिंग राजस्थान समिट के बाद सरकार ने शुक्रवार को एक बड़ा निर्णय लिया। इसके तहत समिट में एमओयू करने वालों को बिना ऑक्शन प्रक्रिया के जमीन का आवंटन किया जाएगा। दरअसल, रीको ने प्रत्यक्ष भूखंड आवंटन योजना स्वीकृत की है। है। इससे उद्योगों को न केवल जल्दी जमीनें मिलेंगी, कीमतों में भी बढ़ोतरी नहीं होगी। योजना में एमओयू पर हस्ताक्षर करने वालों की पात्रता को देखते हुए औद्योगिक भूखंड आवंटित किए जाएंगे। रीको ने इसके लिए ऑनलाइन पोर्टल बनाया है। उद्यमी एसएसओ आईडी के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे।
मालूम हो कि राइजिंग राजस्थान ग्लोबल इंवेस्टमेंट समिट 2024 का आयोजन 9 से 11 दिसंबर के दौरान किया गया था। इसमें देश विदेश के निवेशकों एवं विभिन्न उद्यमियों ने भाग लिया था। इस दौरान उद्यमियों ने करीब 35 लाख करोड़ रुपए के एमओयू सरकार के साथ किए हैं। अब सरकार ने इन एमओयू को धरातल पर उतारने का काम शुरू कर दिया है।
अधिकतम तीन भूखंडों के लिए आवेदन कर सकेंगे
पात्र उद्यमी रीको के औद्योगिक क्षेत्रों में भूखंड की निर्धारित आरक्षित दर पर विभिन्न क्षेत्रफल के अधिकतम 3 भूखंडों के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। इसमें दो विकल्प होंगे। तीन भूखंड के विकल्प एक ही औद्योगिक क्षेत्र या अलग-अलग क्षेत्रों में हो सकते हैं। आवेदन के साथ उन्हें अपने उद्योग की प्रोजेक्ट रिपोर्ट भी सबमिट करनी होगी।
निवेश को आसान बनाने के लिए फैसला कियाः सीएम
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इस फैसले पर कहा है कि राजस्थान में निवेश को आसान बनाने के लिए हमने यह फैसला किया है। इससे जमीन मिलने की प्रक्रिया आसान होगी और नए उद्योग तेजी से स्थापित हो सकेंगे। इससे रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
ग्रामीण क्षेत्र में 50 फीसदी भूखंड एमएसएमई को मिलेंगे
उपखंड अथवा ग्रामीण क्षेत्र के रीको के नए औद्योगिक क्षेत्रों में एमओयू पर हस्ताक्षर करने वाले एमएसएमई को 50 फीसदी भूखंड आवंटित किए जाएंगे। इसमें औद्योगिक क्षेत्र में पहले से एमएसएमई के लिए आरक्षित भूखंड भी शामिल हैं। इसमें भी प्रोजेक्ट रिपोर्ट पर ही आकलन किया जाएगा।
लंबे समय से थी प्रत्यक्ष आवंटन की मांग प्रमुख सचिव
उद्योग विभाग के प्रमुख सचिव एवं रीको चेयरमैन अजिताभ शर्मा ने बताया कि लंबे समय से उद्यमियों की मांग थी कि रीको भूखंडों का आवंटन ई-नीलामी के स्थान पर प्रत्यक्ष करें, ताकि उचित कीमत पर भूमि उपलब्ध हो सके। सरकार ने भी इस पर सकारात्मक रुख दिखाते हुए दिशानिर्देश दिए थे। ऐसे में रीको ने यह योजना तैयार की है। इससे किफायती कीमत पर और वास्तविक उद्यमियों को औद्योगिक क्षेत्रों में भूखंड आवंटित हो सकेंगे। आवंटन प्रक्रिया से समय की बचत होगी। हालांकि, आवंटन पारदर्शिता और मेरिट के आधार पर ही होगा। संबंधित गाइडलाइन तैयार कर ली गई है।
वरीयता निवेश, रोजगार के अवसर, निर्यात की संभावना आदि से तय होगी
आवेदकों की ओर से दी जाने वाली प्रोजेक्ट रिपोर्ट के कंटेंट के आधार पर अंक दिए जाएंगे। इस रिपोर्ट में शामिल किए गए पूंजी निवेश, रोजगार के अवसर की जानकारी, प्रोडक्शन की समय सीमा, उद्योग संचालन का अनुभव, एक्सपोर्ट की संभावना, वर्तमान इकाई के एक्सटेंशन के लिए भूमि की आवश्यकता और टर्नओवर जैसे कारकों के आधार पर मूल्यांकन होगा। इस मूल्यांव मूल्यांकन के आधार पर अधिकतम अंक प्राप्त करने वाले आवेदक को प्रथम वरीयता क्रम में भूखंड आवंटित होंगे। एमओयू करने वाले उद्यमी या समूह को एक ही भूखंड का आवंटन किया जाएगा। यदि किसी भूखंड पर एक से अधिक आवेदक होते हैं तो जिसका निवेश ज्यादा होगा, उसे वरीयता दी जाएगी। यदि किसी भूखंड पर प्रथम वरीयता के आवेदन नहीं आए तो दूसरी और तीसरी वरीयता के आवेदनों पर विचार होगा।