लघु उद्योग भारती दिल्ली प्रदेश ने शुक्रवार को नई सरकार से लघु उद्योगों को बढ़ाने के लिए नई नीति लाने का आग्रह किया है। महासचिव मुकेश अग्रवाल ने शुक्रवार को पत्रकारवार्ता के दौरान आरोप लगाया कि दिल्ली में सरकार की अनदेखी के चलते लघु उद्योग दूसरे राज्यों में जा रहे हैं। इन्हें रोकने के लिए सरकार को जरूरी कदम उठाने होंगे, नहीं तो दिल्ली की जीडीपी में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले लघु उद्योग खत्म हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि वर्तमान में पूरे देश में सबसे महंगी बिजली दिल्ली में मिल रही है। औद्योगिक क्षेत्रों में सुविधाओं का अभाव होने के साथ ही प्रदूषण के चलते ग्रैप लागू होने से काम बंद हुए हैं, जिसका उद्योगों पर सीधा असर पड़ रहा है। दिल्ली में मैन्युफैक्चरिंग की लागत लगातार बढ़ रही है, जो दूसरे राज्यों में दिल्ली की अपेक्षा कम है। दिल्ली का सामान लागत के हिसाब से दूसरे राज्यों के सामान का मुकाबला नहीं कर पा रहा है, जिसके चलते कारोबार पर संकट खड़ा हो गया है।
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का योगदान 33% कम हुआ
2023-24 की आर्थिक सर्वेषण रिपोर्ट का हवाला देते हुए वरुण मित्तल ने बताया कि दिल्ली में कुल 3.94 लाख पंजीकृत एमएसएमई हैं, जिनमें 93 प्रतिशत सूक्ष्म श्रेणी के हैं। 2011-2012 की तुलना में 2023-24 में दिल्ली की जीडीपी में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का योगदान 33 प्रतिशत कम हो गया है। दिल्ली में 20 लाख लोगों को प्रत्यक्ष रूप से रोजगार देने वालें उद्योग सरकार की प्राथमिकता में नहीं हैं। उन्होंने कहा कि अब चुनावों के बाद जिस भी राजनैतिक दल की सरकार बने वह सभी 29 औद्योगिक क्षेत्र और 24 नोटिफाइड क्षेत्रों में लघु उद्योगों के लिए बिजली, पानी, जमीन और प्रदूषण को लेकर नीति तैयार करें।