डूंगरपुर ( प्रातःकाल संवाददाता)। लघु उद्योग भारती चितौड़ प्रान्त के संयुक्त सचिव पवन जैन डूंगरपुर ने बताया कि राजस्थान लघु उद्योग भारती द्वारा लंबे समय से यह मांग की जा रही थी कि उद्योग जो अपने परिसर में रिन्यूएबल एनर्जी सौर ऊर्जा संयंत्र लगाकर विद्युत उत्पादन कर व्यवसाय में कार्य में लेना चाहते थे, उन्हें 500 किलों वाट नेट मेट्रिंग तक के संयंत्र ही लगाने की अनुमति थी। कई मध्यम श्रेणी के उद्यमी जिनकी स्थापित मशीनरी लोड़ तथा उपभोग इससे ज्यादा का था उन्हें 500 किलोवाट से ज्यादा का प्लांट लगाने की अनुमति नहीं मिलती थी। लघु उद्योग भारती ने समय-समय पर विभिन्न मंचों से तथा पूर्ववर्ती सरकार से भी बार-बार मांग की थी कि चूंकि सौर उर्जा एक नैसर्गिक हरित ऊर्जा का स्त्रोत है और सरकार पर इसका कोई अधिभार भी नही पड़ता और राजस्थान में अन्य ऊर्जा स्रोतों में भी सीमित क्षमता है, सरकार को कई बार ऊर्जा संकट का भी सामना करना पड़ता है। उद्योग जगत को हरित ऊर्जा के सहज उपलब्ध स्त्रोत सौर ऊर्जा के संयंत्र सोलर पैनल लगाने के लिए सीमा उद्यमी की उपयोग क्षमता के अनुसार रखी जानी चाहिए।
हाल ही में आयोजित जोधपुर हस्तशिल्प मेले में भी लघु उद्योग भारती प्रदेशाध्यक्ष शांतिलाल बालड ने उद्योग मंत्री राज्यवर्धनसिंह राठौड़ से यह मांग रखी थी, जिसकी समीक्षा करते हुए ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर तथा राठौड़ के प्रयासों से आज उद्योग जगत को एक बहुत बड़ी राहत मिली है। इस आशय का सर्कुलर विद्युत विभाग ने आज जारी कर दिया जिसमें उद्यमी अधिकतम हजार किलोवाट नेट मीटरिंग तक का सौर ऊर्जा संयंत्र लगा सकते हैं। बालड़ ने कहां कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में वर्तमान राज्य सरकार उद्योग जगत की अनेक लंबित समस्याओं का लगातार समाधान कर रही है। बालड़ ने कहां की अभी भी सौलर ऊर्जा नीति में अनेक विसंगतियां है जिनकी समीक्षा कर उन्हें दूर करने के लिए राज्य सरकार को अवगत कराया गया है। लघु उद्योग भारतीय राष्ट्रीय अध्यक्ष घनश्याम ओझा, प्रदेशाध्यक्ष शांतिलाल बालड़, जोधपुर प्रांत अध्यक्ष महावीर चौपड़ा ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर, उद्योग मंत्री राज्यवर्धनसिंह राठौड़, उद्योग राज्य मंत्री के विश्नोई का आभार ज्ञापित किया।