स्वतंत्रता दिवस पर लालकिले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2047 तक भारत को वैश्विक आर्थिक महाशक्ति बनाने के लिए विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देने का आह्वान किया था। इसके बाद दिल्ली में भी औद्योगिक क्षेत्र की समस्याओं को दूर करने की कवायद तेज हो गई है। दिल्ली के उद्योग मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने उद्यमियों के प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक कर उनकी समस्याएं सुनीं और बाधाओं को दूर कर बेहतर औद्योगिक माहौल उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया। बैठक में उद्यमियों ने कहा कि उत्पादन लागत कम किए बिना दिल्ली के उद्योग वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा नहीं कर सकेंगे।
लघु उद्योग भारती, दिल्ली के अध्यक्ष दीवान चंद गुप्ता के नेतृत्व में पहुंचे प्रतिनिधिमंडल में उपाध्यक्ष मुकेश अग्रवाल, भूपेंद्र सिंह, शिवकुमार अरोड़ा और जितेंद्र अग्रवाल शामिल रहे। उद्यमियों ने कहा कि बढ़ती उत्पादन लागत, लीज होल्ड जमीन, महंगी बिजली, पानी की कमी और रखरखाव के नाम पर वसूली से दिल्ली का एमएसएमई क्षेत्र पड़ोसी राज्यों से पिछड़ रहा है।
उद्यमियों ने औद्योगिक भूखंडों को लीज होल्ड से फ्री होल्ड करने और भविष्य में प्लग एंड प्ले मॉडल पर परिसर विकसित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि रेखा गुप्ता की सरकार के समय इस दिशा में प्रयास शुरू हुए थे, लेकिन अभी तक अमल नहीं हुआ। प्रतिनिधिमंडल ने बवाना और नरेला में पीपीपी मॉडल के तहत रखरखाव कर रही निजी कंपनियों में पारदर्शिता की मांग भी उठाई।
बवाना में सीवर ट्रीटमेंट शुल्क में अप्रैल 2022 से 70 प्रतिशत बढ़ोतरी और पिछला एरियर वसूलने का मुद्दा भी उठाया गया। उद्यमियों ने बिजली कंपनियों के खातों की कैग जांच, क्रॉस सब्सिडी का बोझ कम करने और नया इलेक्ट्रिसिटी एक्ट लागू करने की मांग की। साथ ही जल दर घटाने, केंद्र की ओर से एमएसएमई को दी गई 10 केएलडी भूजल उपयोग की छूट दिल्ली में लागू करने और शोधित पानी उद्योगों को उपलब्ध कराने का आग्रह किया गया।
मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि विज्ञान, तकनीक और नवाचार का प्रयोग कर औद्योगिक क्षेत्र की चुनौतियों का समाधान निकाला जा रहा है।


