सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) के हितों की रक्षा के उद्देश्य से लघु उद्योग भारती, रेवाड़ी इकाई ने भारत सरकार के श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के सचिव को ज्ञापन सौंपकर नए श्रम कानूनों के व्यावहारिक क्रियान्वयन हेतु चार महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किए हैं।
संगठन ने नए श्रम कानूनों का स्वागत करते हुए कहा कि MSME क्षेत्र पहले से ही सीमित लाभ मार्जिन पर कार्य कर रहा है। ऐसे में यदि इन कानूनों को बिना किसी राहत के लागू किया गया, तो छोटे उद्योगों पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव पड़ेगा, जिससे रोजगार प्रभावित हो सकता है।
लघु उद्योग भारती की चार प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:
1. वेतन की नई परिभाषा को चरणबद्ध रूप से लागू किया जाए
वेतन की नई परिभाषा के तहत भत्तों को 50% तक सीमित करने से PF और ग्रेच्युटी का भार एक साथ बढ़ेगा। संगठन ने मांग की है कि MSMEs के लिए इस प्रावधान को तीन वर्षों की अवधि में चरणबद्ध रूप से लागू किया जाए, ताकि छंटनी जैसी स्थिति से बचा जा सके।
2. कर्मचारियों की स्वास्थ्य जांच का खर्च ESI वहन करे
ड्राफ्ट OSH नियमों के तहत कर्मचारियों की वार्षिक स्वास्थ्य जांच अनिवार्य है। चूंकि नियोक्ता पहले से ESI में योगदान दे रहे हैं, इसलिए यह जांच IISI अस्पतालों में बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के कराई जानी चाहिए।
3. फिक्स्ड-टर्म कर्मचारियों की ग्रेच्युटी पर सरकारी सहायता मिले
सूक्ष्म इकाइयों के लिए फिक्स्ड-टर्म कर्मचारियों की ग्रेच्युटी एक नई वित्तीय जिम्मेदारी है। संगठन ने मांग की है कि प्रारंभिक तीन वर्षों तक सरकार इस ग्रेच्युटी का कुछ हिस्सा सब्सिडी के रूप में वहन करे, जिससे औपचारिक रोजगार को बढ़ावा मिलेगा।
4. छोटी इकाइयों के लिए सरल सेवा शर्ते लागू की जाएं
50 से कम कर्मचारियों वाली इकाइयों के लिए एक मानक 'एक-पृष्ठीय सेवा शर्त चार्टर' अधिसूचित किया जाए, जिससे कानूनी जटिलताएं कम हों और कर्मचारियों के अधिकार भी सुरक्षित रहें।
अंत में, लघु उद्योग भारती, रेवाड़ी इकाई ने विश्वास व्यक्त किया कि केंद्र सरकार इन सुझावों पर सकारात्मक विचार करेगी और नए श्रम सुधारों को जमीनी स्तर पर सफल बनाएगी।