जयपुर। सोहन सिंह स्मृति कौशल विकास केंद्र, जगतपुरा, जयपुर में ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान आयोजित विशेष कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम में कक्षा 6 से 10 तक की बालिकाओं ने क्रोशिया (Crochet) हस्तशिल्प निर्माण में उल्लेखनीय प्रतिभा और रचनात्मकता का प्रदर्शन किया। प्रशिक्षण के माध्यम से छात्राओं ने न केवल हस्तकला की बारीकियां सीखीं, बल्कि स्वरोजगार एवं उद्यमिता की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम बढ़ाए।
प्रशिक्षण के दौरान बालिकाओं ने वर्तमान बाजार की मांग और नवीन फैशन ट्रेंड को ध्यान में रखते हुए विभिन्न आकर्षक एवं उपयोगी उत्पाद तैयार किए। इनमें की-चेन, हेयर एक्सेसरीज़, सजावटी फूल, बुके, टेबल डेकोरेशन आइटम तथा अन्य हस्तनिर्मित वस्तुएं प्रमुख रहीं। छात्राओं द्वारा तैयार उत्पादों में रंगों का संतुलित चयन, सृजनात्मक सोच और उत्कृष्ट हस्तकौशल स्पष्ट रूप से दिखाई दिया।
इस प्रशिक्षण का संचालन एवं मार्गदर्शन श्रीमती प्रिया डोडा ने किया, जो क्रोशिया उत्पादों के क्षेत्र में एक सफल उद्यमी हैं। उन्होंने प्रतिभागी बालिकाओं को तकनीकी प्रशिक्षण के साथ-साथ उत्पाद डिज़ाइन, गुणवत्ता नियंत्रण, पैकेजिंग, विपणन और स्वरोजगार के अवसरों से भी परिचित कराया। उनके अनुभव आधारित मार्गदर्शन ने छात्राओं को हस्तशिल्प को व्यवसाय के रूप में समझने का अवसर प्रदान किया।
कौशल केंद्र की हस्तशिल्प आयाम प्रमुख श्रीमती वैशाली विशिष्ट ने बताया कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों का उद्देश्य बालिकाओं में आत्मनिर्भरता, आत्मविश्वास और उद्यमशीलता की भावना विकसित करना है। उन्होंने कहा कि कौशल आधारित शिक्षा युवाओं को रोजगार के साथ-साथ स्वरोजगार की दिशा में भी सक्षम बनाती है।
प्रशिक्षण के दौरान निर्मित उत्पादों को देखकर अभिभावकों एवं आगंतुकों ने छात्राओं की प्रतिभा की सराहना की। बालिकाओं द्वारा तैयार किए गए गुणवत्तापूर्ण और आकर्षक उत्पाद इस बात का प्रमाण हैं कि उचित प्रशिक्षण, प्रोत्साहन और मार्गदर्शन मिलने पर छात्राएं हस्तशिल्प आधारित उद्यमिता में उत्कृष्ट सफलता प्राप्त कर सकती हैं।
लघु उद्योग भारती द्वारा संचालित ऐसे कौशल विकास कार्यक्रम युवाओं और बालिकाओं को रोजगारोन्मुख प्रशिक्षण प्रदान कर आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
“कौशल से आत्मनिर्भरता की ओर — यही है विकसित भारत की सशक्त नींव।”