काशी प्रांत में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस पर रेशम एवं बुनकरी क्षेत्र में तकनीकी उन्नयन पर हुआ मंथन
वाराणसी, उत्तर प्रदेश।
लघु उद्योग भारती काशी प्रांत द्वारा राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस के अवसर पर एक विशेष कार्यक्रम आयोजित कर प्रौद्योगिकी के महत्व एवं उसके औद्योगिक उपयोग पर व्यापक चर्चा की गई। ज्ञात हो कि 11 मई 1998 को भारत द्वारा किए गए सफल परमाणु परीक्षण की स्मृति में प्रतिवर्ष 11 मई को राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस मनाया जाता है।
इस अवसर पर लघु उद्योग भारती काशी प्रांत के सचिव डॉ. सर्वेश कुमार श्रीवास्तव, उद्यमी शैलेश प्रताप सिंह, विशाल अग्रहरि, विमलेश मौर्य, गुलशन कुमार मौर्य सहित अनेक उद्यमी साथियों एवं लोहता क्षेत्र की हिंदू महिला बुनकरों ने सहभागिता की। कार्यक्रम में सेंट्रल सिल्क बोर्ड एवं राज्य सिल्क बोर्ड के अधिकारियों की उपस्थिति विशेष रूप से उल्लेखनीय रही।
अधिकारियों ने रेशम एवं बुनकरी क्षेत्र में आधुनिक प्रौद्योगिकी के समावेश, नई मशीनों के उपयोग तथा सरकारी योजनाओं के माध्यम से बुनकरों एवं उद्यमियों को मिलने वाले लाभों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि तकनीकी उन्नयन से उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ व्यापार में भी उल्लेखनीय वृद्धि संभव है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. सर्वेश कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि देश के रेशम उद्योग के विकास के लिए तकनीकी उन्नयन अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान में देश में उपयोग होने वाले रेशम का लगभग 80 प्रतिशत आयात चीन, वियतनाम एवं अन्य देशों से किया जाता है। इसे कम करने के लिए ऐसी स्वदेशी तकनीकों का विकास आवश्यक है, जिससे देश में ही उच्च गुणवत्ता वाले रेशम का अधिक उत्पादन हो सके।
उन्होंने रेशम एवं कपास की खेती को वैज्ञानिक एवं तकनीकी आधार पर बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि यदि आधुनिक तकनीकों का समुचित उपयोग किया जाए तो आने वाले वर्षों में रेशम आयात पर निर्भरता समाप्त की जा सकती है। उन्होंने सभी से आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को मजबूत करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के अंत में विशाल कुमार अग्निहोत्री द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया।