लघु उद्योग भारती की मध्य भारत प्रांत की आंचलिक बैठक शिवपुरी में आयोजित हुई, जिसमें संगठन विस्तार, सदस्यता वृद्धि और छोटे उद्यमियों को जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया। बैठक चार चरणों में सम्पन्न हुई और इसमें विभिन्न जिलों के पदाधिकारियों एवं उद्यमियों ने भाग लिया।
प्रदेश अध्यक्ष राजेश मिश्रा ने कहा कि आंचलिक बैठकों का उद्देश्य इकाइयों के बीच समन्वय और संगठन को अधिक प्रभावी बनाना है। उन्होंने कहा कि संगठन की मजबूती के दो प्रमुख आधार हैं—सदस्यता वृद्धि और कार्य का प्रभावीकरण। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल बड़ी फैक्ट्रियां ही नहीं, बल्कि मोची, हलवाई, रेडीमेड वस्त्र निर्माता, छोटे फैब्रिकेशन कार्य करने वाले और निर्माण क्षेत्र से जुड़े छोटे उद्यमी भी संगठन के सदस्य बन सकते हैं।
उन्होंने कहा कि संगठन की ताकत उसकी सदस्य संख्या में होती है, जिससे शासन और प्रशासन के समक्ष प्रभाव बढ़ता है। उन्होंने कोर टीम के प्रत्येक सदस्य से हर महीने कम से कम एक नया सदस्य जोड़ने का संकल्प लेने का आह्वान किया। साथ ही नियमित मासिक बैठकों और निरंतर संवाद को संगठन की सक्रियता के लिए आवश्यक बताया।
राष्ट्रीय संगठन मंत्री प्रकाश चंद्र अग्रवाल ने कहा कि संगठन का ध्येय “राष्ट्र हित सर्वोपरि” है और सदस्यता विस्तार इसका मुख्य लक्ष्य है। उन्होंने मध्यप्रदेश में सदस्यता अभियान चलाने, आंचलिक एवं जिला स्तरीय बैठकों के माध्यम से संगठन विस्तार करने पर बल दिया।
मध्य भारत प्रांत सचिव रश्मि गुर्जर ने महिला इकाई एवं महिला उद्यमियों की गतिविधियों की जानकारी दी, जबकि महामंत्री विनोद नायर ने आगामी संगठनात्मक लक्ष्यों पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम का संचालन मध्य भारत प्रांत अध्यक्ष सोबरन सिंह तोमर ने किया तथा आभार शिवपुरी जिला अध्यक्ष भूपेंद्र रावत ने व्यक्त किया।
बैठक में प्रदेश महामंत्री अरुण सोनी ने एमएसएमई पॉलिसी और उद्यमियों के हित में हुए प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सोलर सब्सिडी, वेयरहाउसिंग सुरक्षा राशि में कमी, फायर एनओसी में राहत और फैक्ट्री एक्ट में संशोधन जैसे विषयों पर सरकार से निरंतर संवाद किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सीजीटीएमएस योजना में ब्याज दर कम की गई है तथा उद्यमियों को बिना अनावश्यक जांच के 20 लाख रुपए तक का ऋण शीघ्र स्वीकृत कराने की व्यवस्था भी संगठन के प्रयासों से संभव हुई है।
कार्यक्रम में पदाधिकारियों ने यह भी कहा कि औद्योगिक समस्याओं के समाधान के लिए व्यक्तिगत रूप से जाने के बजाय प्रतिनिधिमंडल के रूप में प्रशासन और विभागीय अधिकारियों से संवाद करना अधिक प्रभावी होता है। उन्होंने कहा कि संगठन का अंतिम उद्देश्य “उद्योग हित” के माध्यम से “राष्ट्र हित” की साधना करना है।


