जयपुर के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में आज राजस्थान राज्य औद्योगिक विकास एवं विनियोजन निगम (रीको), सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ स्टोन्स (सिडोस) तथा लघु उद्योग भारती के मध्य इंडिया स्टोन मार्ट–2028 के सफल एवं भव्य आयोजन हेतु त्रिपक्षीय एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता राजस्थान के स्टोन उद्योग को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने और राज्य को औद्योगिक विकास के नए आयामों तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
कार्यक्रम में उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़, उद्योग एवं वाणिज्य राज्य मंत्री के.के. विश्नोई, अतिरिक्त मुख्य सचिव शिखर अग्रवाल, रीको के प्रबंध निदेशक सुरेश ओला, लघु उद्योग भारती के राष्ट्रीय संगठन मंत्री प्रकाश चंद्र जी, राष्ट्रीय सह महामंत्री नरेश पारीक, निवर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष घनश्याम ओझा, आर.के. मार्बल ग्रुप के चेयरमैन अशोक पाटनी, इंडिया स्टोन मार्ट के संयोजक नटवर अजमेरा, सिडोस के उपाध्यक्ष दीपक अजमेरा, फिगसी के महासचिव मनोज सिंह, उपाध्यक्ष सुंदर सोमानी, स्टोना के चेयरमैन हिमांशु सहगल सहित देशभर से आए स्टोन उद्योग के प्रमुख उद्यमी एवं प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
अपने संबोधन में वक्ताओं ने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान सरकार राज्य को देश का अग्रणी औद्योगिक हब बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी दृष्टि के अनुरूप इंडिया स्टोन मार्ट–2028 को पहले से अधिक व्यापक, आधुनिक और अंतरराष्ट्रीय स्वरूप में आयोजित करने की तैयारी अभी से प्रारंभ की जा रही है। इसके लिए देश-विदेश के स्टोन उद्यमियों, निवेशकों और आर्किटेक्ट्स को जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
कार्यक्रम में यह भी रेखांकित किया गया कि सिडोस जहां स्टोन उद्योग से जुड़ी तकनीक, डिजाइन और परीक्षण सुविधाओं का प्रमुख केंद्र है, वहीं रीको के पास आवश्यक अधोसंरचना एवं संसाधन उपलब्ध हैं। दूसरी ओर, लघु उद्योग भारती को एमएसएमई क्षेत्र का व्यापक विश्वास और मजबूत नेटवर्क प्राप्त है। इन तीनों संस्थाओं का यह सहयोग तकनीक, अधोसंरचना और उद्योग जगत के विश्वास का प्रभावी संगम है, जो इंडिया स्टोन मार्ट–2028 को ऐतिहासिक सफलता दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
इस अवसर पर आयोजित विशेष सत्र में स्टोन उद्योग की नई तकनीकों, नवाचारों, वैश्विक बाजार की संभावनाओं, निर्यात संवर्धन तथा उद्योग के समक्ष उपस्थित चुनौतियों पर विस्तृत चर्चा की गई। सरकार एवं उद्योग प्रतिनिधियों ने मिलकर ऐसे सुझावों पर विचार-विमर्श किया, जिनसे राजस्थान के प्राकृतिक पत्थरों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में और अधिक प्रतिस्पर्धी बनाया जा सके तथा उद्योग के माध्यम से रोजगार और निवेश के नए अवसर सृजित किए जा सकें।
यह एमओयू केवल एक प्रशासनिक समझौता नहीं, बल्कि राजस्थान के स्टोन उद्योग को वैश्विक मंच पर नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की साझा प्रतिबद्धता का प्रतीक है, जो आने वाले वर्षों में राज्य की औद्योगिक प्रगति और निर्यात वृद्धि को नई गति प्रदान करेगा।